डेस्क: क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित और महानतम सितारों में से एक, वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान सर गारफील्ड सोबर्स का शुक्रवार को 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि उनके बेटे डेनियल ने की। सोबर्स की बेजोड़ ऑलराउंड क्षमता और खेल पर उनके असाधारण प्रभाव ने उन्हें क्रिकेट इतिहास के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों की श्रेणी में खड़ा किया है।
अद्वितीय करियर और रिकॉर्ड्स
1936 में बारबाडोस में जन्मे सोबर्स ने मार्च 1954 से अप्रैल 1974 के बीच 93 टेस्ट मैच खेले। उन्होंने 57.78 की शानदार औसत से 8,032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक और 30 अर्धशतक शामिल थे। वह न केवल एक विस्फोटक बल्लेबाज थे, बल्कि एक बहुमुखी गेंदबाज भी थे, जो बाएं हाथ से तेज गेंदबाजी के साथ-साथ कलाई और उंगली से स्पिन गेंदबाजी करने में भी सक्षम थे। उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 235 विकेट हासिल किए और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 1,000 से अधिक विकेट झटके।
ऐतिहासिक उपलब्धियां
सोबर्स के नाम कई ऐसे कीर्तिमान हैं जो दशकों तक अटूट रहे:
365 रनों की ऐतिहासिक पारी: 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ किंग्सटन में सोबर्स ने नाबाद 365 रन बनाए थे, जो उस समय टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर था और यह रिकॉर्ड 36 वर्षों तक कायम रहा।
एक ओवर में छह छक्के: 1968 में नॉटिंघमशर के लिए खेलते हुए उन्होंने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओवर की छह गेंदों पर लगातार छह छक्के लगाकर इतिहास रचा था।
भारत के खिलाफ शानदार प्रदर्शन
भारतीय टीम के खिलाफ सोबर्स का प्रदर्शन विशेष रूप से प्रभावशाली रहा। उन्होंने भारत के विरुद्ध 18 टेस्ट मैचों में 8 शतकों की मदद से 1,920 रन बनाए और 59 विकेट भी चटकाए।
क्रिकेट जगत ने दी श्रद्धांजलि
भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) ने सोबर्स को खेल का ‘सच्चा प्रतीक’ बताते हुए कहा कि वह एक ऐसी ‘अमर विरासत’ छोड़ गए हैं जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। क्रिकेट वेस्टइंडीज ने शोक व्यक्त करते हुए लिखा, “एक महान पारी का अंत हो गया। सर गारफील्ड सोबर्स अब और हमेशा हमारे दिलों में रहेंगे”।
सम्मान और विरासत
क्रिकेट में उनके अद्वितीय योगदान के लिए 1975 में उन्हें महारानी एलिजाबेथ द्वितीय द्वारा ‘नाइटहुड’ से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2000 में उन्हें विजडन के पांच ‘क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी’ में शामिल किया गया। उनके सम्मान में ही आईसीसी (ICC) का वार्षिक पुरस्कार ‘सर गारफील्ड सोबर्स’ पुरस्कार के नाम से दिया जाता है।
उनके निधन से क्रिकेट के एक ऐसे युग का अंत हुआ है जिसकी मिसाल सदियों तक दी जाएगी।

