दरभंगा बिहार स्थानीय

40 वर्ष पुराना सामुदायिक भवन बना खंडहर, दीवारों पर उगे पेड़-पौधे

40 वर्ष पुराना सामुदायिक भवन बना खंडहर, दीवारों पर उगे पेड़-पौधे

पंचायत चुनाव में इसी जर्जर भवन में बनता है मतदान केंद्र, ग्रामीणों ने जताई हादसे की आशंका

 

दरभंगा, निशांत झा। हायाघाट प्रखंड की ग्राम पंचायत राज आनंदपुर सहोड़ा के वार्ड संख्या-5 स्थित करीब 40 वर्ष पुराना सामुदायिक विकास भवन आज सरकारी उपेक्षा की कहानी बयां कर रहा है। कभी ग्रामीणों की बैठकों, सामाजिक आयोजनों और सार्वजनिक गतिविधियों का केंद्र रहा यह भवन अब जर्जर होकर खंडहर में तब्दील हो चुका है। भवन की दीवारों और छत पर पेड़-पौधे उग आए हैं, कई स्थानों से छत का हिस्सा टूटकर गिर चुका है तथा दीवारों का प्लास्टर झड़ने से इसकी स्थिति बेहद खतरनाक हो गई है।

सबसे चिंताजनक बात यह है कि बदहाल स्थिति के बावजूद पंचायत चुनाव के दौरान इसी भवन में मतदान केंद्र बनाया जाता है। ऐसे में मतदाताओं, मतदानकर्मियों और सुरक्षा बलों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मतदान के दौरान कोई दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी।

भवन पर लगे शिलापट्ट के अनुसार, इस सामुदायिक विकास भवन का उद्घाटन तत्कालीन दरभंगा प्रमंडलीय आयुक्त श्री वी. जयशंकर (भा.प्र.से.) ने तत्कालीन मुखिया एवं विद्यापति सेवा संस्थान के महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी ‘बैजू’ की अध्यक्षता में किया था। उस समय इसे ग्रामीण विकास और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बनाया गया था।

ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के बाद से भवन के रखरखाव पर कभी गंभीरता नहीं दिखाई गई। वर्तमान मुखिया कृष्णकांत चौधरी तथा पूर्व मुखिया विजय पासवान के कार्यकाल में भी इसके जीर्णोद्धार की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। परिणामस्वरूप यह भवन अब उपयोग के बजाय खतरे का प्रतीक बन गया है।

गौरतलब है कि इसी क्षेत्र से दूसरी बार निर्वाचित विधायक डॉ. रामचंद्र प्रसाद वर्तमान में बिहार सरकार में वन एवं पर्यावरण मंत्री हैं। इसके बावजूद सार्वजनिक उपयोग का यह महत्वपूर्ण भवन वर्षों से बदहाली का शिकार बना हुआ है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, प्रखंड प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों से भवन का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराकर इसकी मरम्मत अथवा पुनर्निर्माण कराने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते आवश्यक कार्रवाई नहीं की गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

ग्रामीण क्षेत्रों में बने सामुदायिक भवन विकास की पहचान माने जाते हैं। यदि ऐसे सार्वजनिक भवन समय पर रखरखाव के अभाव में खंडहर बन जाएं, तो यह केवल सरकारी उदासीनता ही नहीं बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे की अनदेखी का भी गंभीर उदाहरण है।

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