डेस्क: बढ़ते सरकारी कर्ज (Government Debt) को लेकर अब केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि यूरोप की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी चिंता के घेरे में हैं। फ्रांस (France) की वित्तीय स्थिति (Financial position) को लेकर अर्थशास्त्रियों और वैश्विक संस्थानों ने गंभीर चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस राजकोषीय सुधार नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में देश का सार्वजनिक कर्ज उसकी अर्थव्यवस्था (Economy) पर बड़ा बोझ बन सकता है।
फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज पहली तिमाही में बढ़कर 3.5 ट्रिलियन यूरो (करीब 4 ट्रिलियन डॉलर) से अधिक हो चुका है, जो देश की जीडीपी का 117.5 प्रतिशत है। निवेशकों और विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक अनिश्चितता और सुधारों में देरी के चलते यह स्थिति और गंभीर हो सकती है।
‘स्नोबॉल इफेक्ट’ का बढ़ता खतरा
अर्थशास्त्रियों ने फ्रांस के सामने ‘स्नोबॉल इफेक्ट’ का खतरा बताया है। इसका अर्थ है कि जब सरकारी बॉन्ड पर चुकाया जाने वाला ब्याज आर्थिक विकास दर से अधिक हो जाता है, तो कर्ज लगातार बढ़ता जाता है। ऐसी स्थिति में यदि सरकार लगातार प्राथमिक बजट अधिशेष (प्राइमरी बजट सरप्लस) नहीं बनाए रखती, तो कर्ज का बोझ अर्थव्यवस्था के मुकाबले तेजी से बढ़ने लगता है। सरल शब्दों में कहें तो यह ऐसी आर्थिक स्थिति होती है, जिसमें शुरुआत में छोटा दिखने वाला संकट समय के साथ लगातार बढ़कर गंभीर वित्तीय समस्या का रूप ले लेता है।
2050 तक GDP के 203% तक पहुंच सकता है कर्ज
एक रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि यदि मौजूदा हालात बने रहे, तो 2027 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले भी फ्रांस पर कर्ज का दबाव लगातार बढ़ेगा। रिपोर्ट में OECD के महासचिव मैथियास कोरमैन के हालिया बयान का हवाला दिया गया है, जिसमें उन्होंने कहा कि यदि आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो 2050 तक फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज उसकी GDP के 203 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2029 तक केवल ब्याज भुगतान का खर्च करीब 100 अरब यूरो तक पहुंचने की आशंका है।
निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों की भी बढ़ी चिंता
क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज़ की सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सारा कार्लसन ने भी हाल ही में कहा कि सार्वजनिक कर्ज के अनुपात में ब्याज भुगतान का दबाव फ्रांस में सबसे अधिक बढ़ने की संभावना है। वहीं, निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने वित्तीय जोखिमों का हवाला देते हुए अपने ग्राहकों को फ्रांसीसी सरकारी कर्ज में निवेश कम करने की सलाह दी है।
कोविड के बाद भी कम नहीं हुआ कर्ज
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, फ्रांस का सार्वजनिक कर्ज अब कोविड-19 महामारी के दौरान दर्ज स्तर के करीब पहुंच चुका है। कोर्ट डेस कॉम्प्टेस की रिपोर्ट के अनुसार, यूरोजोन में फ्रांस ऐसा एकमात्र देश है जिसने महामारी के बाद अपने कर्ज के बोझ को उल्लेखनीय रूप से कम नहीं किया।
ब्याज भुगतान बना सबसे बड़ा खर्च
वर्ष 2025 में फ्रांस ने कर्ज पर ब्याज चुकाने के लिए 66 अरब यूरो खर्च किए, जो शिक्षा और रक्षा जैसे प्रमुख क्षेत्रों के बजट से भी अधिक माना जा रहा है। कोर्ट डेस कॉम्प्टेस ने चेतावनी दी है कि यह राशि 2029 तक 100 अरब यूरो तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सैद्धांतिक रूप से मजबूत आर्थिक वृद्धि या लगातार प्राथमिक बजट अधिशेष के जरिए इस स्थिति में सुधार संभव है, लेकिन निकट भविष्य में इसकी संभावना कम दिखाई देती है।
कोर्ट डेस कॉम्प्टेस की वरिष्ठ अधिकारी कैरिन कैम्बी ने कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो फ्रांस कर्ज पर ब्याज के बढ़ते बोझ तले दब सकता है और इस स्थिति से बाहर निकलने में कई वर्ष लग सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि इटली लंबे समय तक प्राथमिक बजट अधिशेष बनाए रखने के बावजूद दुनिया की सबसे अधिक कर्जग्रस्त विकसित अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।
चुनावी मुद्दा बन रहा बढ़ता कर्ज
फ्रांस में अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव से पहले बढ़ता सार्वजनिक कर्ज एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बन गया है। प्रमुख सेंट्रिस्ट नेता एडुआर्ड फिलिप और गैब्रियल अट्टल इसे अपने चुनावी अभियान का अहम विषय बना रहे हैं। सांसद केविन मौविएक्स ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि बढ़ता कर्ज देश के लिए गंभीर संकेत है और जितनी देर सुधारों में होगी, उसके परिणाम उतने ही अधिक गंभीर होंगे।

