उत्तर प्रदेश

पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव के कई ठिकानों पर ईडी की छापेमारी

डेस्क:लखनऊ । प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इलाहाबाद जोनल कार्यालय ने बुधवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई झांसी और लखनऊ में एक साथ की गई। यह जानकारी ईडी सूत्रों के हवाले से सामने आई है। ईडी की जांच उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टैब्लिशमेंट द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई है। इस एफआईआर में पूर्व विधायक पर आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोप लगाए गए हैं। इसी के आधार पर ईडी ने ईसीआईआर दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। ईडी की शुरुआती जांच में सामने आया है कि कथित अपराध से अर्जित धन को रियल एस्टेट, निर्माण (कंस्ट्रक्शन) और अन्य कारोबार से जुड़ी कई कंपनियों और एलएलपी के नेटवर्क के जरिए इधर-उधर किया गया। जांच एजेंसी को शक है कि इन संस्थाओं का इस्तेमाल अवैध धन को वैध दिखाने (मनी लॉन्ड्रिंग) के लिए किया गया।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस मामले का संबंध धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत सूचीबद्ध विभिन्न अपराधों से है। ईडी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण में 23 से अधिक एफआईआर दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है, जिनकी जांच को आधार बनाकर कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।
तलाशी के दौरान ईडी की टीम ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और चल-अचल संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। इसके अलावा वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की भी बारीकी से जांच की जा रही है। एजेंसी का उद्देश्य अपराध से अर्जित धन का पता लगाना और इस धन को ठिकाने लगाने या छिपाने में शामिल लोगों की पहचान करना है।
ईडी सूत्रों के मुताबिक, बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच जारी है। एजेंसी धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत मामले की आगे की जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और भी अहम खुलासे हो सकते हैं।

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