डेस्क: जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के डोडा (Doda) जिले में मंगलवार सुबह प्राकृतिक आपदा ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। जिले के थाथरी क्षेत्र में बादल फटना (Cloudburst) के बाद अचानक आई बाढ़ (Flood) और भारी मलबे ने बाजार, रिहायशी इलाकों तथा सड़क संपर्क को गंभीर नुकसान पहुंचाया। घटना के बाद प्रशासन ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, हालांकि संपत्ति और आधारभूत ढांचे को व्यापक क्षति (Damage) पहुंची है।
बादल फटने के बाद ऊंचाई वाले इलाकों से तेज बहाव के साथ कीचड़, पत्थर और मलबा थाथरी कस्बे में पहुंच गया। मुख्य बाजार और जामिया मस्जिद के आसपास का क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा। कई मकानों में मलबा भर गया, जबकि सड़क किनारे खड़े वाहन भी इसकी चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गए। अचानक आई इस स्थिति से स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोगों ने सुरक्षित स्थानों की ओर रुख किया।
घटना का सबसे बड़ा असर बटोटे-डोडा-किश्तवाड़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-244) पर पड़ा, जहां भारी मात्रा में मलबा जमा होने के कारण यातायात पूरी तरह रोकना पड़ा। सड़क बंद होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और क्षेत्र का संपर्क अस्थायी रूप से बाधित हो गया। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि मार्ग पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने तक अनावश्यक यात्रा से बचें।
हादसे की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन से जुड़ी एजेंसियां और अन्य संबंधित विभाग मौके पर पहुंच गए। राहत एवं बचाव कार्य के साथ-साथ सड़क से मलबा हटाने के लिए भारी मशीनों को लगाया गया है। प्रभावित इलाकों में क्षति का आकलन भी किया जा रहा है ताकि जरूरतमंद परिवारों को जल्द राहत उपलब्ध कराई जा सके। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता सड़क संपर्क बहाल करने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर है।
मानसून के सक्रिय होने के साथ ही देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। इसी क्रम में मौसम विभाग ने महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर, इगतपुरी और आसपास के पश्चिमी क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा की संभावना जताई है। इसके मद्देनज़र स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्कूल, कॉलेज, साप्ताहिक बाजार और प्रमुख धार्मिक स्थलों को अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय लिया है ताकि किसी भी संभावित जोखिम से लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।
उधर, ओडिशा में भी अगले कुछ समय तक भारी से अत्यधिक भारी वर्षा का अनुमान व्यक्त किया गया है। तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को समुद्र में नहीं जाने की सलाह दी गई है। वहीं, अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है, जबकि राजधानी क्षेत्र में उमस और गर्मी का असर बना हुआ है। अलग-अलग राज्यों में बदलते मौसम के बीच प्रशासनिक एजेंसियां सतर्क हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
देशभर में सक्रिय मानसून ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि पर्वतीय और संवेदनशील क्षेत्रों में अचानक आने वाली प्राकृतिक आपदाएं बड़े नुकसान का कारण बन सकती हैं। ऐसे में मौसम संबंधी चेतावनियों का पालन, अनावश्यक यात्रा से बचाव और प्रशासन के निर्देशों का पालन ही जोखिम को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।

