उत्तर प्रदेश

राम जन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक को लेकर अयोध्या में बढ़ी हलचल, संत समाज ने जताई चिंता

डेस्क:अयोध्या । राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक से पहले अयोध्या में हलचल तेज हो गई है। संत समाज ने बैठक की पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच, सीईओ नियुक्ति और ट्रस्ट के संभावित फैसलों को लेकर चिंता व्यक्त की है। संतों का कहना है कि आस्था से जुड़े सभी निर्णय पारदर्शी ढंग से लिए जाएं और अयोध्या व संत समाज को विश्वास में लेकर ही आगे बढ़ा जाए। आचार्य वरुण दास महाराज ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बना हुआ है, तब यह बैठक पूरे देश और दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है। उनके अनुसार, इस बैठक पर केवल अयोध्या ही नहीं बल्कि पूरे विश्व की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि यह मामला आस्था से जुड़ा हुआ है। वरुण दास महाराज ने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि ट्रस्ट के कई सदस्य इस बैठक में उपस्थित नहीं होंगे, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को केवल आंतरिक बैठकों तक सीमित न रहकर संत समाज और अयोध्या वासियों के साथ भी पारदर्शी तरीके से संवाद करना चाहिए। उनके अनुसार, राम जन्मभूमि आंदोलन संतों और स्थानीय लोगों के सहयोग से चला था, इसलिए इस परियोजना से जुड़े हर निर्णय में उनकी राय महत्वपूर्ण होनी चाहिए।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी बाहरी व्यक्ति को लाकर ट्रस्ट में पदों का बदलाव करना या प्रशासनिक ढांचे में बड़े परिवर्तन करना अयोध्या के संत समाज को स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) व्यवस्था को लेकर चिंता व्यक्त की और कहा कि इससे परियोजना के सरकारीकरण की आशंका पैदा होती है। उनके अनुसार, यदि ऐसे निर्णय लिए जाते हैं तो संत समाज और स्थानीय लोग इसका विरोध करगें और आंदोलन होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रस्ट को सभी निर्णय सार्वजनिक रूप से और पारदर्शिता के साथ लेने चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार का भ्रम या विवाद न पैदा हो।
वहीं, साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने भी बैठक को लेकर अपनी शंकाएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा, “श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक, जो पहले 11 तारीख को होनी थी, उसे कथित तौर पर गोविंद देव गिरी के दबाव में 6 तारीख को कर दिया गया है। आशंका है कि यह बैठक गड़बड़ी करने के इरादे से बुलाई गई है। जब तक ट्रस्ट के अध्यक्ष मौजूद नहीं हैं, तब तक ऐसी बैठक कैसे हो सकती है? संत समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा।”
महंत सीताराम दास ने कहा, “यह निश्चित रूप से पूरे देश और दुनिया भर के भक्तों के लिए आस्था का विषय है। यह भक्ति, विश्वास और तपस्या का मामला है, और इसलिए सभी की नज़रें इस पर टिकी हैं। इसमें पारदर्शिता होनी चाहिए और हमारी आस्था को किसी भी तरह से ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए। अगर कोई इसे बदनाम करने या इस पर कब्ज़ा करने की कोशिश करता है, तो संत समाज इसे बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेगा।”
वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने बैठक से पहले मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं बैठक के बाद आपसे बात करूंगा। मैं अगले तीन दिनों तक यहीं रहूंगा और आप सभी से मिलकर हर चीज पर विस्तार से चर्चा करूंगा।”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *