डेस्क:नोएडा । गौतमबुद्धनगर के साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने नौकरी और प्रशिक्षण दिलाने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, सिम कार्ड, डेबिट कार्ड और फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं। यह कार्रवाई अभिसूचना संकलन और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर की गई। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी विभिन्न कंपनियों में नौकरी और प्रशिक्षण दिलाने का झांसा देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते थे। इसके लिए वे अन्य कंपनियों का डेटा चोरी कर उसका दुरुपयोग करते थे और कॉल के माध्यम से लोगों से संपर्क कर उन्हें नौकरी दिलाने का भरोसा देकर आर्थिक धोखाधड़ी करते थे। पुलिस ने सेक्टर-63 नोएडा से पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान आदित्य चौहान (20 वर्ष) निवासी एटा, सुमित कुमार (19 वर्ष) निवासी दिल्ली, सूरज गुप्ता (23 वर्ष) निवासी कानपुर नगर, रिषभ (20 वर्ष) निवासी फिरोजाबाद तथा गौरव पाठक (23 वर्ष) निवासी सुल्तानपुर के रूप में हुई है। इनमें से दो आरोपी बीसीए, एक बीएससी, एक बीए तथा एक 12वीं तक शिक्षित है। पुलिस के अनुसार सभी आरोपी मिलकर साइबर ठगी के इस नेटवर्क को संचालित कर रहे थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 9 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 17 सिम कार्ड, 4 डेबिट कार्ड, 2 कंपनी मोहर, चेक बुक, पास बुक और बड़ी मात्रा में कॉलिंग डेटा बरामद किया।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में कुल पांच शिकायतें दर्ज हैं। इनमें उत्तर प्रदेश की एक, बिहार की एक और महाराष्ट्र की तीन शिकायतें शामिल हैं। इस मामले में थाना साइबर क्राइम, गौतमबुद्ध नगर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा आईटी एक्ट की धारा 66सी और 66डी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस अब आरोपियों के नेटवर्क, बैंक खातों और अन्य सहयोगियों की भी जांच कर रही है, ताकि इस साइबर ठगी गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचा जा सके।
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि नौकरी या प्रशिक्षण के नाम पर आने वाले अनजान कॉल, संदेश या ई-मेल पर बिना सत्यापन के भरोसा न करें। किसी भी कंपनी में भर्ती संबंधी जानकारी केवल उसकी आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत माध्यमों से ही प्राप्त करें। नौकरी दिलाने के नाम पर किसी भी व्यक्ति या संस्था को बिना जांच-पड़ताल के पैसे न दें और अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक विवरण, ओटीपी, आधार या पैन कार्ड जैसी गोपनीय सूचनाएं किसी अज्ञात व्यक्ति के साथ साझा न करें।

