अन्य

डॉ अरविन्द कुमार मिलन लिखित पुस्तक ‘पाठ्यचर्या में भाषा : एक परिचय’ का कुलपति ने किया विमोचन

दरभंगा:भाषा सीखने का एक बेहतरीन मध्यम है, जिसके बिना विचारों का आदान- प्रदान नहीं किया जा सकता- कुलपति

 

ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति प्रोफेसर संजय कुमार चौधरी ने दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत संचालित शिक्षाशास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ अरविन्द कुमार मिलन लिखित दो पुस्तकों- हिन्दी में लिखित ‘पाठ्यचर्या में भाषा : एक परिचय’ तथा अंग्रेजी में लिखित ‘An Introduction to Language across the Curriculum’ का विमोचन अपने आवासीय कार्यालय में किया। इस अवसर पर प्रो अशोक कुमार मेहता, प्रो अरुण कुमार सिंह, प्रो विजय कुमार यादव, डॉ आर एन चौरसिया, डॉ शंभू प्रसाद, डॉ मिर्जा रूहुल्लाह बेग, डॉ उदय कुमार, डॉ एस रहमान, डॉ आनंद मोहन, डॉ जयशंकर सिंह, डॉ सैयद मो जमाल अशरफ, कृष्ण मुरारी, आस्थानंद यादव तथा संजय कुमार आदि उपस्थित थे। कुलपति ने डॉ मिलन को बधाई एवं शुभकामना देते हुए कहा कि निश्चय ही ये दोनों पुस्तकें छात्र-छात्राओं के साथ ही शिक्षकों के लिए भी उपयोगी होगी तथा आम पाठकों को शिक्षा के प्रति नया दृष्टिकोण प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि भाषा सीखने का एक साधन है, जिसके बिना विचारों का आदान-प्रदान नहीं किया जा सकता है। भाषा पाठ्यचर्या की आत्मा है, जिस पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। यह हमारे बीच विचारों को व्यक्त करने का एक माध्यम है, जिसका विकास पीढ़ी दर पीढ़ी हुआ है।

तत्पश्चात बी एड (नियमित) विभाग में आयोजित विमोचन कार्यक्रम में बतौर अध्यक्षीय संबोधन में डीएसडब्ल्यू प्रो अशोक कुमार मेहता ने इन पुस्तकों को शिक्षाशास्त्र के अलावे स्नातक एवं स्नातकोत्तर के छात्रों के लिए भी उपयोगी बताते हुए विद्वानों से आग्रह किया कि हम सब इसे पढ़ें और इसे और अधिक उपयोगी बनाने हेतु लेखक का ध्यान खींचे, ताकि उपयोगी बातों को अगले संस्करण में जोड़कर और अधिक उपयोगी बनाया जा सके। विश्वविद्यालय शिक्षाशास्त्र के विभागाध्यक्ष प्रो मो अफाक हाशमी ने मुख्य अतिथि के रूप में कहा कि बी एड के छात्रों को सीसी-4 में भाषा पढ़ाई जाती है। ये पुस्तकें छात्रों के लिए काफी मददगार होंगी और लेखक को भी अमर बनाएगी। महाविद्यालय निरीक्षक प्रो अरुण कुमार सिंह ने कहा कि डॉ मिलन की भाषा पर बड़ी पकड़ रही है। इनमें शैक्षणिक के साथ ही प्रशासनिक क्षमता भी अत्यधिक है। प्रधानाचार्य डॉ जी एम अंसारी ने बधाई एवं शुभकामना देते हुए कहा कि भाषाई कमजोरी के कारण छात्र न तो शुद्ध- शुद्ध बोल पाते हैं, न ही लिख पाते हैं।

संस्कृत-प्राध्यापक डॉ आर एन चौरसिया ने कहा कि भाषा चिन्तन प्रक्रिया का आधार है।भाषा में कमजोर होने पर प्रायः छात्र दूसरे विषयों में भी पिछड़ने लगते हैं। उन्होंने कहा कि भाषा शिक्षा का माध्यम है जो छात्रों में कल्पनाशीलता, संवेदनशीलता तथा रचनात्मकता का विकास करता है। स्वागत संबोधन एवं पुस्तक परिचय में डॉ अरविन्द कुमार मिलन ने कहा कि इन पुस्तकों में 10 अध्याय हैं जो आईएसबीएन युक्त नई दिल्ली के एजुकेशनल पब्लिशिंग हाउस से 2026 में ही प्रकाशित हैं। भाषा के समुचित विकास से छात्रों में अभिव्यक्ति, सृजनात्मकता एवं आलोचनात्मक चिन्तन आदि का स्वत: विकास होता है। संचालन डॉ मिर्जा रूहुल्लाह बेग ने, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ उदय कुमार ने किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *