अंतरराष्ट्रीय

बिहार के बोधगया के महाबोधि मंदिर दर्शन के साथ शुरू हुआ, म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग का पांच दिवसीय भारत दौरा।

बिहार: म्यांमार के राष्ट्रपति और पूर्व सैन्य प्रमुख यू मिन आंग ह्लाइंग पांच दिवसीय भारत दौरे पर हैं। उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत बिहार के बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर में दर्शन के साथ की।

यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब म्यांमार राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक चुनौतियों और सुरक्षा संकट से जूझ रहा है। दूसरी ओर भारत अपने पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आंग ह्लाइंग के बीच होने वाली बैठक में व्यापार, रक्षा सहयोग, सीमा सुरक्षा और कनेक्टिविटी जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। इस यात्रा का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि म्यांमार, भारत और बांग्लादेश के बीच रणनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।

 

आंग ह्लाइंग के भारत आने की है खास वजह

 

म्यांमार के राष्ट्रपति की इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत के साथ राजनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को मजबूत करना है। दोनों देशों के बीच 1,640 किलोमीटर लंबी सीमा है, इसलिए सीमा सुरक्षा और उग्रवाद से जुड़े मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा व्यापार बढ़ाने, सड़क और समुद्री संपर्क सुधारने तथा निवेश को बढ़ावा देने पर भी बातचीत होगी। भारत म्यांमार को दक्षिण-पूर्व एशिया का प्रवेश द्वार मानता है, जबकि म्यांमार भारत को एक महत्वपूर्ण आर्थिक और रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है

 

 आखिर क्या चल रहा है म्यांमार में?

 

फरवरी 2021 में सेना ने तख्तापलट कर लोकतांत्रिक सरकार को हटा दिया था। इसके बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन और सशस्त्र संघर्ष शुरू हो गया। कई जातीय विद्रोही समूह और सेना समर्थित बल अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं। हाल के चुनावों के बाद आंग ह्लाइंग राष्ट्रपति बने हैं, लेकिन देश के कई हिस्सों में स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। राजनीतिक अस्थिरता और सुरक्षा चुनौतियों का असर अर्थव्यवस्था, निवेश और आम लोगों के जीवन पर भी पड़ा है।

 

भारत के लिए म्यांमार इतना महत्वपूर्ण क्यों है?

 

भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ और ‘एक्ट ईस्ट’ नीति में म्यांमार की अहम भूमिका है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को दक्षिण-पूर्व एशिया से जोड़ने वाले कई बड़े प्रोजेक्ट म्यांमार के रास्ते गुजरते हैं। मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश की सीमा म्यांमार से जुड़ी हुई है। इसलिए सीमा पार उग्रवाद, हथियारों की तस्करी और अवैध गतिविधियों को रोकने के लिए दोनों देशों का सहयोग जरूरी माना जाता है। भारत क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए भी म्यांमार के साथ करीबी संबंध चाहता है।

 

क्या है बांग्लादेश एंगल?

 

म्यांमार और बांग्लादेश के रिश्तों में रोहिंग्या शरणार्थी संकट सबसे बड़ा मुद्दा रहा है। लाखों रोहिंग्या मुस्लिम म्यांमार से भागकर बांग्लादेश पहुंचे थे, जिससे ढाका पर भारी दबाव पड़ा। हाल के वर्षों में म्यांमार के रखाइन क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता का असर बांग्लादेश की सुरक्षा पर भी पड़ा है। भारत इस पूरे क्षेत्र में स्थिरता चाहता है क्योंकि म्यांमार और बांग्लादेश दोनों ही बंगाल की खाड़ी के रणनीतिक देशों में शामिल हैं। इसलिए भारत इन दोनों पड़ोसियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश करता है।

 

मोदी-आंग ह्लाइंग मुलाकात से क्या है उम्मीद? 

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति आंग ह्लाइंग की बैठक में रक्षा सहयोग, सीमा सुरक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी पर ठोस फैसले सामने आ सकते हैं। दोनों देश समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग को लेकर भी चर्चा करेंगे। भारत म्यांमार में बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाना चाहता है, जबकि म्यांमार निवेश और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का इच्छुक है। अगर बातचीत सकारात्मक रहती है तो यह न सिर्फ दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करेगी बल्कि पूरे दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक स्थिति को भी मजबूती दे सकती है।

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