डेस्क: पश्चिम बंगाल में नई शुभेंदु सरकार (Shubhendu Adhikari) बनने के बाद अब सबसे बड़ी चुनौती चुनावी वादों को पूरा करने की मानी जा रही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार अपना पहला बजट तैयार कर रही है, लेकिन राज्य की खराब वित्तीय हालत ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
भाजपा ने चुनाव के दौरान महिलाओं को ज्यादा आर्थिक सहायता, बेरोजगार युवाओं के लिए बढ़ा हुआ भत्ता और सरकारी कर्मचारियों को बकाया महंगाई भत्ता (DA) देने जैसे बड़े वादे किए थे। अब इन योजनाओं को लागू करने के लिए राज्य सरकार को भारी रकम की जरूरत पड़ेगी।
54 हजार करोड़ से बढ़कर 1.29 लाख करोड़ तक पहुंच सकता है खर्च
फिलहाल पश्चिम बंगाल सरकार विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं पर करीब 54 हजार करोड़ रुपये सालाना खर्च कर रही है। लेकिन यदि भाजपा अपने प्रमुख वादों को पूरी तरह लागू करती है, तो यह खर्च बढ़कर लगभग 1.29 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
राज्य के सामने पहले से ही गंभीर आर्थिक दबाव है। अनुमान के मुताबिक 2026-27 तक पश्चिम बंगाल का कुल कर्ज 8.15 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। वहीं राजस्व घाटा 21,759 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है, जो नई योजनाओं के बाद और बढ़ सकता है।
वित्त विभाग के अधिकारियों का मानना है कि अतिरिक्त योजनाओं और डीए भुगतान के कारण यह घाटा 31 हजार करोड़ रुपये तक जा सकता है।
‘लक्ष्मी भंडार’ का नाम बदला, बढ़ेगी सहायता राशि
ममता बनर्जी सरकार की लोकप्रिय ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना का नाम बदलकर भाजपा सरकार ने ‘अन्नपूर्णा भंडार’ कर दिया है। वर्तमान में इस योजना के तहत करीब 2.20 करोड़ महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जा रही है।
सामान्य वर्ग की महिलाओं को अभी 1,500 रुपये और एससी-एसटी वर्ग की महिलाओं को 1,700 रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। इस योजना पर अभी करीब 39 हजार करोड़ रुपये खर्च होते हैं।
भाजपा ने चुनाव में सभी महिलाओं को 3,000 रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया था। यदि यह लागू हुआ तो अकेले इस योजना का खर्च करीब 79 हजार करोड़ रुपये सालाना हो जाएगा।
बेरोजगारी भत्ता भी बनेगा बोझ
टीएमसी सरकार ने चुनाव से पहले ‘युवा साथी’ योजना शुरू की थी, जिसमें युवाओं को 1,500 रुपये मासिक भत्ता देने का प्रावधान था। इसके लिए करीब 84 लाख युवाओं ने आवेदन किया था।
इस योजना पर फिलहाल करीब 15 हजार करोड़ रुपये सालाना खर्च हो रहे हैं। भाजपा ने इस राशि को बढ़ाकर 3,000 रुपये प्रति माह करने का वादा किया है। ऐसा होने पर खर्च बढ़कर 30 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।
इसके साथ भाजपा ने अगले पांच वर्षों में एक करोड़ रोजगार और स्वरोजगार के अवसर देने का भी दावा किया है।
डीए और सातवें वेतन आयोग से बढ़ेगा भारी दबाव
भाजपा ने सत्ता में आने के 45 दिनों के भीतर सातवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने और सरकारी कर्मचारियों का डीए बकाया चुकाने का वादा किया था।
इसका लाभ करीब 3.25 लाख कर्मचारियों और 3.5 लाख पेंशनभोगियों को मिलेगा। फिलहाल बंगाल सरकार के कर्मचारियों को 18 प्रतिशत डीए मिल रहा है, जबकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को 60 प्रतिशत तक डीए दिया जा रहा है।
इस अंतर को खत्म करने के लिए राज्य सरकार को हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। वहीं सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पुराने डीए बकाए के भुगतान में लगभग 42 हजार करोड़ रुपये का बोझ और बढ़ सकता है।
केंद्र की योजनाओं से राहत की उम्मीद
राज्य सरकार को उम्मीद है कि कुछ योजनाओं को केंद्र सरकार की स्कीमों में शामिल करके वित्तीय दबाव कम किया जा सकेगा। उदाहरण के तौर पर आयुष्मान भारत योजना लागू होने से राज्य की ‘स्वास्थ्य साथी’ योजना का खर्च कम हो सकता है।
सरकार के अधिकारियों का कहना है कि ‘डबल इंजन सरकार’ होने के कारण अब केंद्र से पहले की तुलना में ज्यादा वित्तीय सहयोग मिलने की उम्मीद है।
राजस्व बढ़ाने और खर्च घटाने की तैयारी
राज्य के मुख्य सचिव मनोज अग्रवाल ने कहा है कि सरकार राजस्व बढ़ाने और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती की रणनीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि जनता ने भाजपा को ऐतिहासिक जनादेश दिया है और सरकार लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरने की कोशिश करेगी।
हालांकि आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते कर्ज और बड़े कल्याणकारी वादों के बीच संतुलन बनाना शुभेंदु सरकार के लिए आसान नहीं होगा।

