डेस्क: पंजाब एंड सिंध बैंक (पीएंडएसबी) के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) स्वरूप कुमार साहा ने कहा है कि यूपीआई के जरिये भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (एमडीआर) ग्राहकों से नहीं वसूल सकते हैं। उन्होंने कहा कि 15 अक्टूबर के बाद भी खुदरा ग्राहकों को वस्तुओं और सेवाओं के लिए वही कीमत चुकानी होगी, जो व्यापारी ने संबंधित सामग्री में प्रदर्शित की है।
सीईओ ने कहा कि 15 अक्टूबर से 2,000 रुपये से अधिक के व्यक्ति-से-व्यापारी (पी2एम) यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क लगेगा, जिसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी। हालांकि, दो व्यक्तियों के बीच लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। साहा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”यूपीआई के जरिये भुगतान स्वीकार करते समय व्यापारियों को एमडीआर का शुल्क ग्राहकों से लेने की अनुमति नहीं है।
व्यवस्था यह सुनिश्चित करती है कि ग्राहक केवल वस्तु में प्रदर्शित कीमत का ही भुगतान करें।” उन्होंने कहा कि 2,000 रुपये तक के छोटे मूल्य के यूपीआई लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ऐसे लेनदेन व्यापारियों के कुल यूपीआई की मात्रा के 95 प्रतिशत से अधिक हैं। साहा ने कहा कि उचित एमडीआर लगाने का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि रोजमर्रा के लेनदेन के लिए यूपीआई सुलभ और सुविधाजनक बना रहे तथा दीर्घकाल में इसके पूरे तंत्र को टिकाऊ बनाया जा सके। यह पूछे जाने पर कि अगर व्यापारियों को शुल्क देना शुरू करना पड़ा तो क्या दुकानों पर वस्तुओं की कीमतें बढ़ सकती हैं, साहा ने कहा कि बाजार की परिस्थितियां और भुगतान के पिछले रुझान बताते हैं कि व्यापारी कारोबार बढ़ाने के लिए मामूली डिजिटल भुगतान लागत को खुद वहन करते हैं।
उन्होंने कहा कि भुगतान स्वीकार करने की लागत सामान्य परिचालन खर्च मानी जाती है, जिसकी भरपाई अधिक ग्राहकों के आने, औसत खरीद मूल्य बढ़ने और नकदी संभालने से जुड़े जोखिम कम होने से हो जाती है। साहा ने कहा कि ग्राहक वस्तुओं और सेवाओं के लिए सूचीबद्ध कीमत का ही भुगतान करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि रेलवे, दूरसंचार सेवाओं, बीमा और ईंधन सहित कुछ विशेष श्रेणियों के व्यापारियों के लिए दो हजार रुपये से अधिक के लेनदेन पर प्रति लेनदेन पांच रुपये का समान एमडीआर लागू होगा।


