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सुपौल : कार्यशाला में ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020’ के प्रावधानों को लागू करने के संबंध में दी गई जानकारी

सुपौल (प्रमोद यादव) : जिला मुख्यालय के बिहार शिक्षा परियोजना कार्यालय के सभागार में एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन जगतपति चौधरी, क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक की अध्यक्षता में किया गया। इस कार्यशाला में स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग शिक्षा मंत्रालय भारत सरकार के द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को लागू करने हेतु बताया गया। इस कार्यशाला में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में आने वाले नए बदलाव के बारे में समझ विकसित की गई ।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक कोशी प्रमंडल सहरसा, जेपी चौधरी के द्वारा किया गया। उद्घाटन सत्र के दौरान अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में 10+2 प्रणाली पर आधारित है । इसमें और व्यापक बदलाव करते हुए 5+3 + 3 +4 के चार स्तर में बदलाव किया बदला जाएगा । कक्षा 1 एवं कक्षा 2 से पहले कक्षा 3 साल आंगनबाड़ी प्राथमिक विद्यालय में फ्री स्कूलिंग होगी । कक्षा 6 से ही कौशल विकास को भी जोड़ा गया है । कक्षा 9 से 12 की पढ़ाई के दौरान छात्रों के संकाय के स्थान पर विषय चुनने की आजादी होगी। नई शिक्षा नीति इस तरह से बनी है कि स्कूल से हर विद्यार्थी एक कौशल लेकर स्कूल से निकलेगा।

कार्यशाला में सुरेंद्र कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी सुपौल के राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र ‘परख’ के बारे में भी प्रतिभागियों को व्यापक रूप से बताया गया । शिक्षक स्वेच्छा से 50 घंटे के सतत व्यावसायिक विकास कार्यक्रम में भाग लेंगे। संभाग प्रभारी शम्स आलम ने बताया कि केजीबीवी उत्क्रमित होकर ग्रेड 12 तक विस्तारित हो जाएगी । स्कूल क्लस्टर के निर्माण हेतु सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी से सुझाव मांगा गया है, जिससे उन्हें मॉडल के रूप में भेजा जा सकेगा । यूनिसेफ जीपीएस बीएस के जिला समन्वयक प्रशांत कुमार सिंह ने कार्यशाला में भाग लेते हुए कहा कि प्रत्येक प्रखंड एक या एक से अधिक स्कूल क्लस्टर का निर्माण कर जिला में जमा करेंगे । कार्यशाला का धन्यवाद ज्ञापन डीईओ द्वारा किया गया ।

कार्यक्रम में सर्व शिक्षा के सभी संभाग प्रभारी, लेखा पदाधिकारी, सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, सभी प्रखंड साधन सेवी एवं प्राथमिक तथा माध्यमिक विद्यालय के रिसोर्स शिक्षक के साथ यूनिसेफ जीपीएसवीएस के जिला समन्यक ने भी भाग लिया।

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