साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

त्तर प्रदेश के नए राजनीतिक तीर्थ स्थल लखीमपुर और किसान आंदोलन की चर्चा करते हुए ककुवा ने कहा- अति अउ हठ सब कहूँ नुकसानदायक हय। किसान आंदोलन केरे नाम पय अब अति होय रही हय। याक तरफ मोदी सरकार राजहठ पर हय। दुसरी तरफ स्वयंभू किसान नेता त्रिया हठ कय रहे हयँ। इ आंदोलन मा राजनीति तौ पहिलेन दिन ते घुसि गय रहे। यहै राजनीति अउ हठ के चलते आंदोलन अपनी राह ते भटक गवा। दिल्ली बॉर्डर, हरियाणा अउ यूपी मा अब तलक कयू किसान बेमौत मारे जाय चुके हयँ। कुछ किसान नेतन के संग विपक्षी पार्टियां अपनी राजनीतिक रोटी सेंक रही हयँ। देस केरा आम किसान सब देखि अउ समझ रहा हय।
चतुरी चाचा आज अपने चबूतरे पर कुछ अनमने से बैठे थे। वह लखीमपुर में किसान आंदोलन की भेंट चढ़े आठ लोगों को लेकर दुःखी थे। पुरई उनके हुक्के की चिलम भर रहा था। गाँव के कुछ बच्चे चबूतरे से थोड़ी दूर पर कबड्डी खेल रहे थे। मौसम बड़ा सुहावना था। ककुवा, मुंशीजी, कासिम चचा व बड़के दद्दा चबूतरे पर विराजमान थे। मेरे वहां पहुंचते ही ककुवा लखीमपुर कांड पर शुरू हो गए। उनका कहना था कि किसान आंदोलन के पीछे बड़ी राजनीति है। मुद्दा अब तीन कृषि कानून नहीं हैं, बल्कि मसला मोदी और भाजपा को सत्ता से बेदखल करने का है। किसानों को मोदी विरोध के लिए मोहरा बनाया गया है। हठीले और अतिवादी आंदोलनकारियों ने किसानों को बदनाम कर दिया है।
चतुरी चाचा ने ककुवा की बात को आगे बढ़ाते हुए कहा- कृषि कानूनन केर विरोध केवल पँजाब, हरियाणा अउ पश्चिमी यूपी केरे किसान कय रहे हयँ। का खेती ते जुड़े तीनों कानून हिंयय लागू कीन गये हयँ? अरे, कृषि कानून तौ पूरे देस मा लागू भा हय। साल बीति रहा, कृषि कानूनन केरा कहूँ विरोध नाय होय रहा। देस क सारा किसान अपनी खेती-बाड़ी मा मस्त हय। इ ढाई राज्यन केरे किसान आंदोलन कय रहे हयँ। यहिके पीछे कौनव बड़ा षड्यंत्र हय। नेता लोग किसान आंदोलन केरी शुरुआत करत बखत बताईन रहय कि मोदी सरकार काला कानून लाई हय। अब देस केरी सबै मंडी बन्द होय जैइहैं। सरकार अपन एमएसपी योजना बन्द कय देई। सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पय किसान ते उनकी उपज न खरीदी। उद्योगपति मनमाने दाम पय फसल खरीद ल्याहैँ। किसानन केरी जमीन बड़े-बड़े पूंजीपति लिखवाए ल्याहैँ। मुला, ई सब बातें झूठ निकरी। अइस कुछु नाय भवा।
इसी बीच चंदू बिटिया बेसन में बनी कद्दू के फूल की कुरकुरी पकौड़ियाँ और तुलसी-अदरक वाली स्पेशल चाय लेकर आ गई। प्रपंचियों ने जलपान करने के बाद चाय के कुल्हड़ उठा लिये। चाय की चुस्कियों के साथ प्रपंच आगे बढ़ा।
बड़के दद्दा ने कहा- किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी तल्ख़ टिप्पणी की है। इन लोगों ने कृषि कानूनों के विरोध के नाम पर पहले दिल्ली बॉर्डर सील किया। ट्रैक्टर रैली निकाल कर दिल्ली के अंदर लाल किले पर नँगा नाच किया। केंद्र सरकार बराबर वार्ता करती रही। परन्तु, ये लोग कानून रद करने की अपनी जिद पर अड़े रहे। अभी कुछ दिन पहले हरियाणा में बवाल काटा। वहां भी एक किसान की मौत हुई। इस हफ्ते यूपी के लखीमपुर में तांडव किया। इसमें एक पत्रकार सहित आठ लोगों की मौत हो गई। जिस राज्य में चुनाव होता है, वहां तथाकथित किसान नेता भाजपा का विरोध करने पहुंच जाते हैं। इस आंदोलन को कांग्रेस, वामपंथी व अन्य विपक्षी दल खाद-पानी दे रहे हैं। आम जन यह समझ गया है कि इस आंदोलन का मकसद मोदी-योगी सरकार को सिर्फ बदनाम करना है।
मुंशीजी ने कहा- प्रधानमंत्री मोदी व गृहमंत्री शाह बड़े-बड़े मसले चुटकियों में हल कर देते हैं। परन्तु, न जाने क्यों? ये दोनों नेता किसान आंदोलन नहीं समाप्त करवा पा रहे हैं। इतनी मजबूत सरकार और इतना बड़ा संगठन किसान आंदोलन के आगे बौना साबित हो रहा है। माना कि देश का 70 प्रतिशत किसान और खेतिहर मजदूर भाजपा के पक्ष में है, किन्तु साल भर से चल रहा यह किसान आंदोलन मोदी सरकार व भाजपा की छवि पर बट्टा लगा रहा है। हरियाणा की घटना में भाजपा की खूब किरकिरी हुई। अब यूपी का लखीमपुर कांड भाजपा के लिए गुड़ भरा हँसिया बन गया है। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री व उनके बेटे पर एक पत्रकार सहित चार किसानों को कुचल देने का आरोप लगा है। हालांकि, इस दुर्घटना के बाद आक्रोशित किसानों ने जीप ड्राइवर सहित चार भाजपा कार्यकर्ताओं को बड़ी बेरहमी से पीट-पीटकर मारा डाला था। विपक्षी दल घटना की भोर से केंद्रीय मंत्री को बर्खास्त करने और उनके आरोपी बेटे को तत्काल गिरफ्तार करने के लिए सरकार पर हल्ला बोल रहे हैं। पँजाब कांग्रेस के अध्यक्ष सिद्धू लखीमपुर में धरने पर बैठे हैं।
कासिम चचा ने कहा- कांग्रेस के सर्वोच्च नेता राहुल गाँधी व उनकी बहन प्रियंका वाड्रा किसानों के साथ हैं। राहुल गांधी अपने साथ छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल व पँजाब के सीएम चन्नी के साथ सबसे पहले लखीमपुर पहुँचे थे। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव भी लखीमपुर व बहराइच जाकर मृतक किसानों के परिजनों से मिल चुके हैं। अन्य विपक्षी दलों के नेता लगातार लखीमपुर पहुंच रहे हैं। पूरे देश में लखीमपुर की घटना से आक्रोश है। लोकतंत्र में सरकार के गलत कार्यों का विरोध करने का अधिकार सबके पास है। भाजपाई अपने विरोधियों का मुंह बंद करवाने के लिए तरह-तरह का हथकंडा अपना हैं। धरना दे रहे किसानों पर जीप चढ़ा दी गयी। जिला प्रशासन आंख पर पट्टी बांधे बैठा रहा। अगर जिला प्रशासन समय रहते एक्शन लेता तो आठ लोगों की जान न जाती। यदि भाजपा नेता अपना कार्यक्रम टाल देते तो इतना भीषण हादसा न होता। परन्तु, ऐसा नहीं हुआ।
अंत में चतुरी चाचा ने सबको शारदीय नवरात्र व विजय दशमी की शुभकामनाएं दीं। चाचा ने मुझसे कहा- रिपोर्टर भइय्या, तुम करोना अपडेट दे दो, फिर प्रपंच का समापन किया जाए।
मैंने प्रपंचियों को कोरोना अपडेट देते हुए बताया कि विश्व में अबतक 23 करोड़ 79 लाख से ज्यादा लोग कोरोना की जद में चुके हैं। इनमें 48 लाख 56 हजार से ज्यादा लोग बेमौत मारे जा चुके हैं। इसी तरह भारत में अबतक तीन करोड़ 39 लाख से ज्यादा लोग कोरोना पीड़ित हो चुके हैं। इनमें साढ़े चार लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। भारत में रोज 21 हजार से ज्यादा नए मरीज मिल रहे हैं। ऐसे में मॉस्क और दो गज की दूरी का पालन जरूरी है। त्योहारों के इस सीजन में भीड़ से दूर रहना ही उचित होगा। देश में जगह-जगह शिविर लगाकर लोगों को टीका लगाया जा रहा है। अबतक तकरीबन 97 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। आगामी 31 दिसम्बर तक सभी वयस्क नागरिकों को टीका लगना है। देश बच्चों की कोरोना वैक्सीन का बेसब्री से इंतजार कर रहा है।
इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही लेकर फिर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

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