साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

तुरी चाचा यूपी सहित अन्य राज्यों में आसन्न विधानसभा चुनाव और नेताओं की सक्रियता की चर्चा करते हुए कहा- आजु काल्हि विधायक बनय क खातिर नेता मतदातन केरे पांवन मा लोटय रहे। जउन नेता बिटिया क बिहाये मा नेउता देहे नइ आवत रहयँ। उई नेता बिन बुलाय गाय क खीझरा खाय आय रहे। नेता गांव-गली म घुमि रहे। खेत-खरिहान म किसानन ते मिलि रहे। गरीब-गुरबन केरी खूब मदद कय रहे। कौनव साड़ी, कौनव घड़ी, कौनव कैलेंडर/डायरी बांटि रहा। कौनव मरीज का इलाज कराय रहा। कौनव विपत्ति मा 10-20 हजार नकद दै रहा। नेतन मा देवदूत बनय केरी आपस मा होड़ मचि हय। यहे नेता चुनाव क बादि ढूंढ़े न मिलिहैं।
मैं आज प्रपंच चबूतरे पर सबसे पहले पहुंच गया था। पुरई बड़ी तल्लीनता से चतुरी चाचा का हुक्का भर रहा था। चतुरी चाचा मिठाई का डिब्बा लेकर चबूतरे पर आ गए। वह मिठाई का डिब्बा रखकर हुक्का गुड़गुड़ाने लगे। तभी कासिम चचा व मुंशीजी की जोड़ी चबूतरे पर आ गई। उनके पीछे से ककुवा व बड़के दद्दा भी चबूतरे पर पधार गए। ककुवा ने मिठाई का डिब्बा देखते ही पूछा- आजु मीठा काहे खातिर आवा हय? चतुरी चाचा बोले- सब जने पहिले मुंह मीठा करव। फिर प्रपंच गाँठव। हमार भतीजा नायाब तहसीलदार बनिगा हय। मुख्यमंत्री योगी केरे हाथ ते वहिका शुक्रवार का नियुक्ति पत्र मिला रहय। इस खुश खबर से सारे प्रपंचियों में प्रसन्नता की लहर दौड़ गयी। सबने चाचा को बधाई दी। फिर दो-दो कालाजाम खाए। चतुरी चाचा ने विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट पर बतकही का आगाज किया। उनका कहना था कि नेता चुनाव के समय क्षेत्र में रातदिन सक्रिय रहते हैं। नेता चुनाव के बाद अपने क्षेत्र से गूलर के फूल की तरह गायब हो जाते हैं।
चतुरी चाचा की बात को आगे बढ़ाते हुए मुंशीजी ने कहा- आजकल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब व गुजरात आदि राज्यों में जनता मजे कर रही है। जो नेता पांच साल अपने घर पर भी नहीं मिलते थे। वही नेता आजकल मतदाता की देहरी पर माथा रगड़ रहे हैं। नेतागण जनता की सेवा करने में अहर्निश जुटे हैं। सबका एक ही लक्ष्य है कि कैसे भी विधायक बन जाएं। एमएलए बनने की चाह नेताओं को जनता के बीच ले आयी है। जनता भी मौके का फायदा उठा रही है। आज का मतदाता नेताओं की भाषा बोलने लगा है। लोग सबकी सेवा ले रहे और सबको जिता रहे। अंत में जिताएंगे किसे, यह जनता जनार्दन ही जानती है। लेकिन, यह बात समझ नहीं आ रही कि आखिर विधायक बनने के लिए लोग करोड़ों रुपये क्यों खर्च कर रहे? विधायक बनकर पांच साल में कितना कमा लेंगे? जो चुनाव के महीनों पहले ही करोड़ों रुपए खर्च किये दे रहे हैं।
इस पर कासिम चचा बोले- विधायक बनकर नेतागण पांच पीढ़ियों के लिए कमा लेते हैं। अगर किस्मत से मंत्री बन गए तो कहने ही क्या। फिर तो देखते ही देखते अकूत सम्पत्ति बटोर लेते हैं। इसी लालच में नेता आजकल अपनी रकम से कहीं हैण्डपम्प लगवा रहे। कहीं किसी गरीब की झोपड़ी पक्की करवा रहे। कहीं नाली/खड़ंजा सही करवा रहे। कहीं स्ट्रीट लाइट लगवा रहे। जरूरतमंदों को 10-20 हजार की आर्थिक मदद भी दे रहे। इस समय जनता की सेवा करने की प्रतियोगिता चल रही है। हर नेता इस प्रतियोगिता में अव्वल आने को बेताब है। ये लोग नीचे ही नहीं खर्च कर रहे, बल्कि टिकट के लिए ऊपर भी मोटी रकम खर्च कर रहे हैं। जनता जानती है कि पांच साल बाद ही यह बसंत बाहर आती है। इस चुनाव के बाद अगले चुनाव तक पतझड़ का ही मौसम रहेगा। नेता भी सोचते हैं कि पांच महीने जनता की सेवा करके पांच साल सत्ता का परम सुख भोगना है। परन्तु, यह प्रवत्ति लोकतंत्र के लिए कहीं से भी अच्छी नहीं है।
इसी बीच चंदू बिटिया प्रपंचियों के लिए जलपान लेकर आ गयी। आज तुलसी-अदरक की कड़क चाय के साथ स्वादिष्ट फरे थे। हम सब लोगों ने चावल के आटे और उड़द की दाल से बने फरा देसी घी के साथ खाए। फिर ताजा पानी पीकर सबने चाय के कुल्हड़ उठा लिये।
ककुवा ने प्रपंच को आगे बढ़ाते हुए कहा- वैसय तौ तुम पंच नेतन के बारे मा बड़ी माकूल बातय कहे हौ। मुला, याक बात हम कहब। जब ते मोदी अउ योगी आये हयँ। तब ते काली कमाई पय रोक लागि हय। पहिले क तना नेता लोग अर्झा-बिरझ कमाए नाय पावत हयँ। सात साल पहिले केर घोटाला याद करव। तब अरबन खरबन क्यारु खेलु होत रहय। अब नेता अउ अफसर फूँक-फूँक कय कदम रक्खत हयँ। रिश्वत अउ कमीशन तौ अबहिंयू चलि रहा हय। मगर, जादा गड़बड़ घोटाला नाय होय रहा। रही बात नेतन के जनसेवक बनय की। तौ आजव तमाम नेता अइसे हैं। जउन नेता अपने क्षेत्र मा बराबर बने रहत हयँ। उई बिना धनबल अउ बाहुबल के चुनाव जीतत हयँ।
बड़के दद्दा ने विषय परिवर्तन करते हुए कहा- कल राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी एवं अभूतपूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयन्ती पर प्रधानमंत्री ने कचरा मुक्त भारत बनाने का आवाहन किया है। मोदी ने जल संरक्षण की भी अपील की है। हम सबको प्रधानमंत्री की अपील पर ध्यान देना चाहिए। हर नागरिक को अपना घर ही साफ नहीं रखना चाहिए, बल्कि अपने घर के आसपास भी सफाई रखनी चाहिए। वायु, जल एवं ध्वनि प्रदूषण को कम करने में अपना योगदान देना चाहिए। साथ ही, हम सबको जल की बर्बादी को रोकना ही होगा। अब पानी को पानी की तरह बहाना ठीक नहीं होगा। भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए वर्षा जल संचयन करना होगा। नदियों में गन्दा नाला और हरियाली पर आरा चलाना बन्द करना होगा। जल, जमीन, जंगल की सुरक्षा में प्रत्येक नागरिक को सहभागिता करनी होगी। तभी बात बन सकेगी।
मैंने कोरोना का अपडेट देते हुए बताया- विश्व में अबतक 23 करोड़ 51 लाख लोग कोरोना से पीड़ित हो चुके हैं। इनमें 48 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इसी तरह भारत में अबतक तीन करोड़ 38 लाख से ज्यादा लोग कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। इनमें चार लाख 48 हजार से अधिक लोग बैमौत मारे गए। उत्तर भारत में कोरोना काफी हद तक नियंत्रित है। लेकिन, दक्षिण भारत विशेषकर केरल में कोरोना अपना रौद्र रूप दिखा रहा है। ऐसे में मॉस्क और दो गज की दूरी का पालन जरूरी है। त्योहारों के इस सीजन में लापरवाही भारी पड़ सकती है। बहरहाल, देश में जगह-जगह शिविर लगाकर अधिक से अधिक लोगों को टीका लगाया जा रहा है। अबतक 90 करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाई जा चुकी है। इस साल के अंत तक सभी वयस्क नागरिकों को वैक्सीन लगाने का लक्ष्य है। वहीं, बच्चों की कोरोना वैक्सीन आने का सभी को इंतजार है।
इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही लेकर फिर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

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