साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

कुवा ने आजादी के अमृत महोत्सव की चर्चा करते हुए कहा- अपन देस आजादी का अमृत महोत्सव मनाय रहा हय। इ अमरत्व केरे महोत्सव मा देस अपन इतिहास, अपन संघर्ष अउ अपनी उपलब्धियन का याद कय रहा हय। इ महोत्सव मा देस का आजाद करावै वाले स्वतंत्रता सेनानिन का याद कीन जाय रहा हय। इमा हम सभे का सहभागिता करय का चाही। आजु काल्हि आकाशवाणी, दूरदर्शन अउ अखबारन मा यहिकी खूब चर्चा होय रही हय।
चतुरी चाचा आज मौसम की तरह बड़े अच्छे मूड में थे। वह अपने चबूतरे पर पालथी मारे हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे। ककुवा, कासिम चचा, मुंशीजी व बड़के दद्दा मेरा इंतजार कर रहे थे। चबूतरे के पास ही गांव के बच्चे ‘सियर सटाकना’ खेल रहे थे। मेरे पहुंचते ही ककुवा ने देश के आजाद होने की 75वीं वर्षगाँठ और उससे जुड़े अमृत महोत्सव की चर्चा शुरू कर दी। ककुवा अमृत महोत्सव को लेकर बड़े हर्षित थे। वह इस महोत्सव के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानना चाहते थे।
चतुरी चाचा ने ककुवा की इच्छा को देखते हुए आजादी के अमृत महोत्सव के बारे में बताया- देश के विभिन्न हिस्सों में विगत 15 अगस्त, 2021 से नाना प्रकार के कार्यक्रम चल रहे हैं। इसमें देश की अदम्य भावना दिखाने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जा रहे हैं। भारत 15 अगस्त, 1947 को गुलामी की जंजीरों से आजाद हो गया था। 15 अगस्त, 2022 को भारत अपनी आजादी की 75वीं वर्षगाँठ मनाएगा। 75वीं वर्षगाँठ के 75 सप्ताह पहले आजादी का अमृत महोत्सव शुरू हो गया है। इस अमृत महोत्सव से जुड़े कार्यक्रम 15 अगस्त, 2023 तक जारी रहेंगे। इस महोत्सव के बहाने भारत अपनी 75 साल की यात्रा से जुड़ी कहानी कहेगा। यह महोत्सव दुनिया के सामने अपनी श्रेष्ठता साबित करने का अवसर दे रहा है।
बड़के दद्दा ने बताया- केन्द्र सरकार व राज्य सरकारों ने इस महोत्सव की तैयारी पहले से ही कर ली थी। गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता वाली एक राष्ट्रीय क्रियान्वयन समिति ने इस महोत्सव की देखरेख कर रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज़ादी के अमृत महोत्सव की औपचारिक शुरुआत 12 मार्च को साबरमती आश्रम से ही कर दी थी। दरअसल, 12 मार्च, 1930 को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी। दांडी मार्च को नमक सत्याग्रह तौर पर याद किया जाता है। वर्ष 1930 में अंग्रेजों ने भारतीयों को नमक बनाने से रोक दिया था। भारत के जनमानस को इंग्लैंड के नमक को खरीदने की मजबूरी थी। इतना ही नहीं, गोरी हुकूमत ने अपने नमक पर कई तरह के टैक्स भी लगा दिए थे। इस अन्याय को समाप्त कराने के लिए गाँधी जी ने नमक सत्याग्रह किया था। इसलिए आजादी के अमृत महोत्सव में 12 मार्च का ऐतिहासिक महत्व है।
इसी बीच चंदू बिटिया हम प्रपंचियों के लिए जलपान लेकर आ गई। आज कुल्हड़ वाली स्पेशल चाय की जगह गिलोय का काढ़ा था। वहीं, पानी पीने के लिए गाय के दूध और गुड़ से बना ‘खीझरा’ था। खीझरा देखते ही ककुवा ने पूछा- का हो चतुरी भाई। तुमार गाय बियाय गई का? चतुरी चाचा ने जवाब दिया- ककुवा भाई, बिफै का हमार गाय बछिया दिहिस रहय। सुम्बार का हमरी चंदू बिटिया क्यार जलमदिन हय। वहिके पहिले घरमा दूध होय गवा। सभी प्रपंचियों ने चंदू बिटिया को उसके 14वें जन्मदिन पर आशीर्वाद एवं मुद्राएं प्रदान कीं। जलपान के बाद प्रपंच फिर शुरू हुआ।
मुंशीजी ने कहा- कोरोना महामारी में कई बड़े शक्तिशाली देश हिल गए। लेकिन, भारत ने कोरोना पर अपने तरीके से नियंत्रण किया। भारत ने कोवैक्सिन, कोविशील्ड नामक अपनी स्वदेशी कोरोना वैक्सीन ईजाद की। भारत में बीते कई महीने से विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। अभी 17 सितम्बर को प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर एक दिन में ढाई करोड़ लोगों को टीका लगाने का विश्व रिकॉर्ड बनाया। इसके पहले भी दो दिन में दो करोड़ से अधिक टीके लगाने का रिकॉर्ड दर्ज हुआ था। देश के 85 करोड़ से अधिक वयस्क नागरिकों को निःशुल्क कोरोना टीका लगाया जा चुका है। साथ ही, भारत अपने मित्र देशों को कोरोना से लड़ने में मदद भी कर रहा है। इतना ही नहीं, हमने दुनिया को दिखा दिया कि आपदा में भी अवसर कैसे खोजा जाता है?
बड़के दद्दा ने कहा- भारत के बढ़ते कद को देखकर सारी दुनिया आश्चर्यचकित है। आज समूचा विश्व भारत की तरफ देख रहा है। आज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत को बड़ी गम्भीरता से सुना जाता है। भारत ने चीन और पाकिस्तान को पूरी दुनिया से अलग-थलग कर दिया है। अफगानिस्तान एवं तालिबान पर बड़े-बड़े देश नाप-तौल कर बोल रहे हैं। वहीं, भारत ने आतंकी संगठन तालिबान पर खरी-खरी कहने में कोई गुरेज नहीं किया। प्रधानमंत्री मोदी ने शनिवार को अमेरिका के राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति से भेंटवार्ता की थी। उन्होंने क्वाड देशों की बैठक में भी भारत का पक्ष बड़ी मजबूती से रखा। भारत मानवता का संदेश पूरे विश्व को दे रहा है। साथ ही, भारत आतंकवाद व विस्तारवाद के खिलाफ सभी देशों को एकजुट करने की कवायद भी कर रहा है।
कासिम चचा ने कहा- एक संकल्प लाखों संकल्प का उजाला बांट सकता है। यदि दृढ़ संकल्प लेने का साहसिक प्रयत्न किया जाए। हमारे प्रधानमंत्री मोदी ने अंधेरों, अवरोधों और अक्षमताओं से संघर्ष करते हुए आगे बढ़ने की मुहिम शुरू की। मोदी सरकार ने बीते वर्षों में अनेक साहसिक निर्णय लिए हैं। ऐसे में आज़ादी के अमृत महोत्सव का आनंद दोगुना होना स्वाभाविक है। निराशा के बीच आशा के दीये टिमटिमा रहे हैं। भारत में एक नई सभ्यता, संस्कृति करवट ले रही है। नए राजनीतिक मूल्यों, नए विचारों, नए इंसानी रिश्तों, नई जिंदगी की हवाओं के साथ आजाद मुल्क की नई गाथा लिखी जा रही है। आजादी के 75वें वर्ष में प्रवेश करते हुए हम वास्तविक आजादी का स्वाद चखने लगे हैं। आतंकवाद, जातिवाद, क्षेत्रवाद व अलगाववाद की कालिमा छट रही है।भारत विश्व की एक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। हम आत्मनिर्भर भारत, सशक्त भारत एवं नए भारत की तरफ अग्रसर हैं। भारत की सरजमीं पर अब आजादी की वास्तविक इबारत लिखी जा रही है।
चतुरी चाचा ने कहा- आजादी का यह उत्सव उन लोगों के लिए एक आवाहन है। जो लोग आलसी, हताश बनकर सिर्फ सफलता के सपने ही देखा करते हैं। जो लोग अपनी दुर्बलता को मिटाकर नई जीवनशैली अपना नहीं पाते हैं। आजादी का अमृत महोत्सव एक संदेश दे रहा है कि हम जीवन से कभी पलायन न करें। हम अपने जीवन को परिवर्तन दें। विकास की संभावना को तलाशें। अपना आत्मविश्वास और साहस जगाकर कुछ नया करें। सच पूछिए तो यह अमृत महोत्सव वास्तव में भारतीय लोकतंत्र के लिए अमृत साबित होगा। बशर्ते, यह सिर्फ सरकारी आयोजन बनकर न रह जाए। इस महोत्सव में जन सामान्य की सहभागिता बहुत जरूरी है। हम सब जैसे अन्य तमाम धार्मिक, सांस्कृतिक उत्सव मानते हैं। हमें ठीक उसी तरह इस अमृत महोत्सव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए। तभी यह महोत्सव अपनी अपेक्षित सफलता को प्राप्त करेगा।
अंत में मैंने कोरोना का अपडेट देते हुए सबको बताया- विश्व में अबतक 23 करोड़ 19 लाख लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें साढ़े 47 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इसी तरह भारत में अबतक तीन करोड़ 36 लाख से ज्यादा लोग कोरोना की गिरफ्त में आ चुके हैं। इनमें चार लाख 46 हजार से अधिक लोगों को बचाया नहीं जा सका। भारत में किसी हद तक कोरोना को नियंत्रित किया गया है। लेकिन, केरल और महाराष्ट्र में कोरोना का तांडव जारी है। ऐसे में कोरोना नियमों का पालन बहुत जरूरी है। त्योहारों के इस मौसम में लापरवाही बड़ी भारी पड़ सकती है। बहरहाल, केंद्र सरकार ने घर-घर टीका लगाने की अनुमति दे दी है। आगामी 31 दिसम्बर तक 18 प्लस के सभी नागरिकों को वैक्सीन देने का लक्ष्य है। बच्चों को भी बहुत जल्दी कोरोना वैक्सीन देने का कार्य शुरू होगा। उधर, केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि वह कोरोना से मरने वालों के आश्रितों को 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद करेगी।
इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही लेकर फिर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

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