साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

तुरी चाचा ने संसद में कई दिनों से चल रहे हंगामे की चर्चा करते हुए कहा- सगरे विपक्षी सांसद पेगासस जासूसी कांड को लेकर हलकान हैं। जिस संसद में इस वक्त कोरोना महामारी, टीकाकरण, बाढ़, महंगाई, बेरोजगारी व अन्य राष्ट्र हित के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए थी उस संसद में पिछले कई दिनों से सिर्फ फोन टैपिंग को लेकर कोहराम मचा है। सांसदों को बस अपनी जासूसी की चिंता है। विपक्षी सांसद अपने व्यक्तिगत मुद्दे को लेकर संसद नहीं चलने दे रहे हैं। इन सांसदों को जनता के मुद्दों से कोई लेनादेना नहीं है।
आज भोर में सावन की रिमझिम बारिश के बाद मौसम बड़ा खूबसूरत हो गया था। आसमान में काली घटाएं छाई थीं। चबूतरे के पास नीम के पेड़ में झूला पड़ा था। गांव के आधा दर्जन बच्चे पटरे पर बैठकर झूल रहे थे। चतुरी चाचा अपने चबूतरे पर हुक्का गुड़गुड़ा रहे थे। कासिम चचा व मुंशीजी अपना आसान ग्रहण कर चुके थे। मेरे पहुंचते ही चतुरी चाचा ने लोकसभा व राज्यसभा में हो हंगामे की चर्चा शुरू कर दी। तभी ककुवा व बड़के दद्दा की जोड़ी भी चबूतरे पर पधार गई।
चतुरी चाचा ने अपनी बात पूरी करते हुए कहा- फोन टैपिंग का इतिहास बड़ा पुराना है। इस तरह की जासूसी सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी दशकों से होती आ रही है। किसी का सामान्य तौर पर फोन टैप किया जाना या फिर उसकी जासूसी की जानी गलत है। यह व्यक्ति की आजादी में खलल है। इससे नागरिकों के मूल अधिकार में हनन होता है। लेकिन, इसको मुद्दा बनाकर संसद को न चलने देना सर्वथा गलत है। विपक्ष को देश के अन्य मुद्दों के साथ इस मुद्दे पर भी संयमित होकर चर्चा करनी चाहिए। पेगासस जासूसी कांड पर सरकार अपना पक्ष रख चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले की सुनवाई करने की हामी भर ली है। ऐसे में विपक्षियों को संसदीय कार्य को बाधित नहीं करना चाहिए।
कुकवा बोले- चतुरी भइय्या, तुमरेव राजनीति क प्लास्टिक वाले कीड़ा हयँ। तुम घुमि फिरि कय राजनीति केरा बतखाव करत हौ। हमरे ससुरी या राजनीति पल्ले नाय परत। हम बस मतलब भरेक जानकारी राखित हय। नेतन केरी अजीब लीला हय। अपन तनख्वाह, सुख, सुविधा बढ़ावे खातिर सब एकजुट होय जात हयँ। जनता क मुद्दे प सत्ता अउ विपक्ष मा ‘गुलगुलन मार’ होय लागत हय। संसद मा गम्भीर चर्चा होय क बजाय शोर-शराबा होत हय बस। ई बखत ‘पेगासस जिन्न’ बोतल ते निकरा हय। विपक्ष का कोरोउना महाब्याधि, टीका, बेकारी, महंगाई अउ बहिया प बात करय क चही। मुला, विपक्षी खाली अपनी जासूसी प सरकार का घेरय रहे। हम तौ कहित हय भइय्या। नेतन क चक्कर मा न परव। सब जने जुटयाय अपन कामु करव अउ अपन बाति करव।
इसी बीच चंदू बिटिया चना की मासलेदार घुघरी और तुलसी-अदरक की कड़क चाय लेकर आ गई।सबने चने की स्वादिष्ट घुघरी ख़ाकर पानी पीया। फिर कुल्हड़ वाली चाय के साथ प्रपंच आगे बढ़ा।
कासिम चचा ने बहुत दिनों बाद प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ करते हुए कहा- अब देश के हर गांव में प्ले स्कूल खुलेंगे। साथ ही, इंजीनियरिंग की पढ़ाई 11 भाषाओं में होगी। केंद्र सरकार का निर्णय स्वागत योग्य है। मोदी जी को चाहिए कि इसी के साथ मेडिकल की पढ़ाई भी भारतीय भाषाओं में शुरू करवा दें। इससे ग्रामीण क्षेत्र के मेधावी बच्चे बड़ी मात्रा में डॉक्टर और इंजीनियर बन सकेंगे। क्योंकि, गांव के बच्चे अंग्रेजी भाषा के कारण मात खा जाते हैं। जबकि शहर के बच्चों से ज्यादा ज्ञान ग्रामीण बच्चों में होता है।
मुंशीजी ने कासिम चचा की बात पर मोहर लगाते हुए कहा- उच्च स्तर पर व्यवसायिक पढ़ाई का माध्यम और पाठ्यक्रम अंग्रेजी में होने के कारण हमारे गांव के बच्चों को अवसर नहीं मिल पाता है। मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, लॉ इत्यादि की पढ़ाई हिन्दी सहित अन्य भारतीय भाषाओं में ही होनी चाहिए। अंग्रेजी को सिर्फ सम्पर्क की भाषा ही रखनी चाहिए। इसके साथ गाँव के समस्त प्राथमिक स्कूलों में नर्सरी से ही बच्चों को अंग्रेजी का ज्ञान दिया जाना चाहिए। तभी गांव की मेधा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर दिखाई देगी।
बड़के दद्दा ने यूपी के आसन्न विधानसभा चुनाव की बात करते हुए कहा- भाजपा अगला विधानसभा चुनाव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चेहरे पर ही लड़ेगी। भाजपा की चौतरफा तैयारियों को देखते हुए बसपा व सपा ने समाज को जाति व धर्म के खाँचे में बंटाने रणनीति बना ली है। बसपा की तर्ज पर सपा भी ब्राह्मण सम्मेलन करने जा रही है। विपक्षी दल भाजपा और योगी जी को ब्राह्मण विरोधी साबित करने की जुगत में हैं। उधर, भाजपा गजब पैंतरे बदल रही है। वैसे, ओवैसी की सक्रियता से भाजपा की राह होती जा रही है।
हमने सबको कोरोना का अपडेट देते हुए बताया कि विश्व में अबतक पौने 20 करोड़ लोग कोरोना से संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 42 लाख 18 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई। इसी तरह भारत में अबतक तीन करोड़ 15 लाख से अधिक लोग कोरोना से पीड़ित हो चुके हैं। इनमें से चार लाख 23 हजार से ज्यादा लोगों को बचाया नहीं जा सका। आम लोगों की घोर लापरवाही को देखते हुए कोरोना की तीसरी लहर आने की आशंका बलवती है। कोरोना के डेल्टा प्लस वैरियंट को लेकर समूची दुनिया सहमी है। लोग मॉस्क और दो गज की दूरी का पालन नहीं कर रहे। इसी बड़ी गलती से दो लहरों में हजारों लोगों की मौत हो गयी थी। वही गलती फिर दोहराई जा रही है। हालांकि, सरकार सभी को मुफ्त कोरोना वैक्सीन देने की कवायद में जुटी है। अभी तक करीब 46 करोड़ लोगों को टीका लगाया जा चुका है। बच्चों के टीके पर गहन परीक्षण चल रहा है।
अंत में कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के मौके पर परपंचियों ने उन्हें याद किया। इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को फिर चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही लेकर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

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