साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

मैं आज प्रपंच चबूतरे पर थोड़ा देर से पहुंचा। चतुरी चाचा बीचोबीच चबूतरे पर विराजमान थे। चबूतरे के तीन तरफ दो-दो गज की दूरी पर कुर्सियां पड़ी थीं। इन कुर्सियों पर ककुवा, कासिम चचा, मुन्शीजी व बड़के दद्दा बैठे थे। वहीं, एक कोने में कुछ मॉस्क और सेनिटाइजर की शीशियां रखी थीं। लोहे की बड़ी बाल्टी में पानी, पीतल का बड़ा लोटा व डिटॉल साबुन रखा था। चबूतरे पर पूरी तरह सन्नाटा था। मेरे पहुंचते ही चतुरी चाचा उर्जित हो गए।
प्रपंच की शुरुआत करते हुए चतुरी चाचा बोले- गांव में कोई बुजुर्ग खांस रहा है। शहर कोई युवा हांफ रहा है। सड़कों पर एम्बुलेंस की चिल्ल-पों है। अस्पतालों में गहमागहमी है। कोई आक्सीजन के लिए हाल-बेहाल है। कोई दवा-इंजेक्शन के लिए परेशान है। चौक-चौराहों से लेकर चौपाल-गलियारों तक वीरानी है। हर शख्स यहाँ डरा-सहमा है। श्मशान में चिताएं चटक रही हैं। कब्रिस्तान में लंबे गड्ढे खोदे जा रहे हैं। वहीं, रक्तबीज जैसा कोरोना बड़ा खुशहाल है। नेताओं के मनमोहक बयान हैं। अधिकारियों के काल्पनिक आंकड़े हैं। देश की स्थिति बड़ी खराब है। निरीह जनता को कोरोना से लड़ने के छोड़ दिया गया। जब हर जगह आग की ऊँची लपटें उठने लगी। तब सरकारों ने कुंआ खोदना शुरू किया। अरे! यह कोई बात हुई?
कासिम चचा ने कहा- भारत में यह कोरोना की दूसरी लहर है। अभी तो यहाँ तीसरी लहर आनी बाकी है। कोरोना की पहली लहर ने बुजुर्गों को ज्यादा शिकार बनाया था। दूसरी लहर युवाओं को अधिक निगल रही है। तीसरी लहर बच्चों पर भारी पड़ने की आशंका है। वैसे ही दो साल से बच्चे घर में कैद हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई और खेलकूद सब सीमित है। आखिर इस महामारी से निजात कब, कैसे मिल सकेगी?
मुन्शीजी ने कहा- पहली लहर में झटपट पूरे देश में सख्त लॉकडाउन लगा दिया था। पिछले साल जनता से ताली-थाली बजवाई गई थी। पीएम ने समय से पहले ही दिवाली मनवाई गई थी। देश में लचर व्यवस्था के चलते लाखों कामगारों को शहर से गाँव पलायन करना पड़ा था। पैदल चलते-चलते न जाने कितने लोग रास्तों में मर गए थे। सरकार ने इससे कुछ नहीं सीखा। पूरा साल बीतने के बाद भी कोरोना से लड़ने के पुख्ता इंतजाम नहीं किये गए। सत्ताधारी नेता बंगाल की सत्ता पाने के लिए जनता को उसके हाल पर छोड़ दिया। उधर, पश्चिम बंगाल में भाजपा को सत्ता हासिल नहीं हो पाई। इधर, देश में कोरोना ने विकराल रूप धारण कर लिया। अब तो भाजपा के कट्टर समर्थक भी भाजपा से नाराज हैं।
इसी बीच चंदू बिटिया गुनगुना नींबू पानी व गिलोय काढ़ा लेकर आ गयी। आज चंदू बिटिया ने मॉस्क के साथ चेहरे पर फेसशील्ड भी लगा रखी थी। वह चबूतरे पर ट्रे रखकर तुरन्त फुर्र हो गयी। परपंचियों ने नींबू पानी पीने के बाद काढ़े का कुल्हड़ उठा लिया। तभी नदियारा भौजी भी आ गईं। चतुरी चाचा ने उनसे पूछा- बहुरिया, तुमरे ट्वाला मा सब कुशल मंगल है? नदियारा भौजी बोली- चाचा, हमरे मोहल्ले मा तीन जने कोरोना ते ठीक होय गए। अब हमरे उनके जुकाम-बुखार है। उनकी खातिर गिलोय लेय जँगलवा जाय रहेन। इतना कहकर नदियारा भौजी हंसिया लेकर जंगल की तरफ चली गईं।
ककुवा ने बतकही को आगे बढ़ाते हुए कहा- कोराउना महाब्याधि सबु तहस नहस कय दिहिस। केतना मनई मरि गवा। कौनिव गिनती नाय है। सरकारी आंकड़ा ते कैयो गुना अदमी मरि गवा है। बीमारन केरी गिनतिव बहुतै कम बताई जाय रही। सरकार आक्सीजन तलक दय नाय पा रही। दवा-दारू कय का बाति कीन जाय। सरकार अब दुई महीना गरीबन का मुफ्त अनाज देई। मुला, जब मनई इलाज बिना मरिन जाई, तौ युहु अनाज को खाई? हम तौ कहित है कि जनता खुदय एकजुट होय कय कोराउना ते लड़य अउ जीतय। सरकार केरे भरोसे न रहय अब।
बड़के दद्दा बोले- केंद्र सरकार और कुछ राज्य सरकारों ने बहुत कुछ किया है। इस बात को भूलना नहीं चाहिए। वरना, देश में तबाही मच जाती। शहर के शहर श्मशान बन जाते। पिछले साल भी सरकार ने युद्ध स्तर पर कोरोना लड़ने की सारी तैयारी की थी। मोदी जी की दृढ़ इच्छाशक्ति और दूरदर्शिता के चलते देश में आनन-फानन में दो किस्म के कोरोना टीका ईजाद हो गए। मॉस्क, पीपीई किट, वेंटिलेटर व कई दवाओं का उत्पादन बड़े स्तर पर शुरू हुआ। इस वर्ष 18 साल से ऊपर वालों का टीकाकरण किया जा रहा है। अब जगह-जगह आक्सीजन के प्लांट लगाए जा रहे हैं। सरकार ने नहीं, बल्कि जनता ने घोर लापरवाही बरती है। इसी का दुष्परिणाम सबके सामने है।
चतुरी चाचा ने कहा- हमें सिर्फ सरकार की आलोचना के बजाय उन लोगों की निंदा करनी चाहिए, जो हमारे बीच के लुटेरे हैं। तमाम धन पशुओं ने इस राष्ट्रीय आपदा को अवसर के रूप में ले रखा है। ये दुष्ट लोग बेड, एम्बुलेंस, ऑक्सीजन सिलिंडर, इंजेक्शन, दवा, खाद्यान्न व श्मशान में काली कमाई कर रहे हैं। सरकार ऐसे लोगों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करनी चाहिए।
अंत में हमने कोरोना अपडेट देते हुए सबको बताया कि सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में चार लाख से अधिक मामले रोज आ रहे हैं। रोज चार हजार से ज्यादा मौतें हो रही हैं। वहीं, प्रतिदिन तकरीबन तीन लाख लोग स्वस्थ भी हो रहे हैं। देश के 12 राज्य कोरोना से सर्वाधिक बेहाल हैं। कोरोना पर काबू पाने के लिए रेलवे व सेना युद्ध स्तर पर जुटी है। विश्व समुदाय भी भारत में बढ़ते संक्रमण से चिंतित है। कई देश भारत को मदद भेज रहे हैं। रूस ने अपनी स्पूतनिक वैक्सीन भेजी है। इधर, सरकार ने टीकाकरण अभियान को और तेज कर दिया है। कोरोना की तीसरी लहर आने की सूचना से चिंता बढ़ गई है। बच्चों के संक्रमित होने की आशंका से सब लोग चिंतित हैं। सरकार को बच्चों के इलाज और टीकाकरण के लिए अभी से ही तैयारी कर लेनी चाहिए। हम सबको मॉस्क और दो गज की दूरी का कड़ाई से पालन करना चाहिए।
इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। आप सभी को विश्व मातृ दिवस की बड़ी बधाई एवं ईद की अग्रिम मुबारकबाद! मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही लेकर हाजिर रहूँगा। तब तक के लिए पँचव राम-राम!

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