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जुलाई तक शुरू हो सकती है एक और नई वैक्सीन ZyCoV-D की सप्लाई, जानिए बाकी से कैसे अलग है Cadila की Vaccine

डेस्क : गुजरात की कंपनी जाइडस कैडिला भी कोरोना वैक्सीन पर काम कर रही है. सरकार की तरफ से अनुमति मिलने के बाद कंपनी वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर चुकी है. कंपनी के मुताबिक, महज 9 महीने में गुजरात में वैक्सीन का प्लांट लगाया गया और यह काम आसान नहीं था. प्लांट लगाने में जिन उपकरणों की जरूरत होती है, वे बेहद खास होते हैं, इसलिए वैक्सीन का प्लांट बनाने में अच्छा खास वक्त लग जाता है.

जाइडस कैडिला के एमडी डॉ. शरविल पटेल ने ‘CNBC TV18’ को बताया कि कंपनी की तरफ से तैयार हो रही ZyCoV-D वैक्सीन की प्रभावोत्पादकता (इफीकेसी) का डेटा मई महीने में जारी हो सकता है. इसके बाद इमरजेंसी यूज अप्रूवल के लिए जून में अरजी दी जाएगी और संभव है कि जुलाई तक इस वैक्सीन की सप्लाई शुरू कर दी जाए.

जल्द आएंगी 2-3 वैक्सीन

शरविन पटेल ने बताया कि भारत में और भी 2-3 वैक्सीन जल्द आने वाली हैं जो अगस्त तक मिलनी शुरू हो जाएगी. शरविल पटेल ने बताया कि वैक्सीन बनाने के लिए कोई प्लांट तैयार करने में 9-12 महीने तक का वक्त लग जाता है. इसका मतलब यह नहीं होता कि कोई कंपनी हर तरह की वैक्सीन बनाने लगेगी. भारत में वैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग फैसलिटी बहुत छोटी है जबकि देश में वैक्सीन की बहुत ज्यादा मांग है.

कैडिला की वैक्सीन का ट्रायल

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जाइडस कैडिला ने ZyCoV-D वैक्सीन का फेज-3 ट्रायल पूरा कर लिया है और अब डेटा एनालिसिस का काम चल रहा है. इसके रिजल्ट बहुत जल्द प्रकाशित हो सकते हैं जिसमें इफीकेसी के बारे में बताया जाएगा. देश के 60 क्लीनिकल ट्रायल सेंटर पर 28,216 लोगों पर ट्रायल किया गया है जिनमें बुजुर्ग और 12 साल से कम उम्र के बच्चे भी शामिल हैं. वैक्सीन के दूसरे ट्रायल में कंपनी ने 1 हजार से ज्यादा स्वस्थ वॉलंटियर पर क्लीनिकल ट्रायल किया था जिसके रिजल्ट काफी अच्छे आए थे.

12 करोड़ टीके का निर्माण

जाइडस कैडिला के गुजरात स्थित प्लांट में एक साल के अंदर 12 करोड़ ZyCoV-D वैक्सीन का निर्माण होगा. इस साल जून महीने के आसपास वैक्सीन का प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा. कंपनी कुछ अन्य कंपनियों के साथ साझेदारी कर 6-7 करोड़ वैक्सीन ज्यादा बनाने की तैयारी में है. जाइडस कंपनी ने कोरोना वैक्सीन बनाने के लिए रिसर्च-डेवलपमेंट और मैन्युफैक्चरिंग पर 150-250 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. कंपनी अभी बायोसेफ्टी लेवल-1 पर काम कर रही है जिसमें जिंदा वायरस का इस्तेमाल नहीं किया जाता. इसलिए वैक्सीन का प्रोडक्शन बढ़ाना कंपनी के लिए बहुत चुनौती का काम नहीं है.

डीएनए पर आधारित वैक्सीन

जाइडस की वैक्सीन प्लासमिड डीएनए के आधार तैयार हो रही है जिसमें SARS-CoV-2 का प्रोटीन इस्तेमाल किया गया है. यह वैक्सीन लगते ही शरी में SARS-CoV-2 का एंटीजन बनता है जो उसी हिसाब से एंटीबॉडी बनाने में मदद करता है. इस वैक्सीन को 2-8 डिग्री तापमान पर रखा जा सकता है. यह वैक्सीन तीन डोज में दी जाएगी. पहले दिन, फिर 28वें दिन और अंत में 56वें दिन.

दूसरी ओर भारत बायोटेक की कोवैक्सीन, सीरम की कोविशील्ड और स्पुतनिक वी 2 डोज की वैक्सीन है. जाइडस कैडिला की वैक्सीन डीएन पर आधारित है जबकि वाकी वैक्सीन आरएनए टेक्नोलॉजी पर. एक बार ZyCoV-D वैक्सीन की सफलता का पता चल जाए तो इसे बड़े स्तर पर बनाने में दिक्कत नहीं आएगी क्योंकि यह बायोसेफ्टी लेवल-1 पर तैयार होती है जबकि बाकी वैक्सीन बायोसेफ्टी लेवल 3 पर पर बनाई जाती हैं.

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