साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ज चतुरी चाचा अपने चबूतरे पर बड़ी गम्भीर मुद्रा में बैठे थे। उनसे कुछ दूर पर कासिम चचा व मुन्शीजी बैठे थे। चबूतरे के पास पानी भरी बाल्टी, लोटिया व साबुन रखा था। चतुरी चाचा के सामने कुछ नए मॉस्क व सेनिटाइजर की शीशियां रखी थीं। मैं भी साबुन से हाथ-पैर धोकर चबूतरे के किनारे पड़ी एक कुर्सी पर बैठ गया। तभी ककुवा व बड़के दद्दा की जोड़ी चबूतरे पर पधार गई। दोनों जन सेनिटाइज होकर कुर्सियों पर विराजमान हो गए।
चबूतरे के सन्नाटे को तोड़ते हुए ककुवा बोले- का हो चतुरी भाई। बड़ा शांत बैइठ हौ। का आजु प्रपंच न होई। अब तौ अपने गांव केरे सब मरीज नगेटिव होय गए। चतुरी चाचा बोले- मेरी चिंता सिर्फ अपने गांव-जंवार को लेकर नहीं है। मुझे पूरे देश-प्रेदश की चिंता है। अखबार और टीवी में कोरोना की खबरें देखकर मेरी चिंता बढ़ जाती है। कोरोना रोज अपना रिकॉर्ड तोड़ रहा है। दिनोंदिन नए मरीजों की संख्या ही नहीं बढ़ रही, बल्कि मौत का आंकड़ा भी बढ़ता ही जा रहा है।
इस पर ककुवा बोले- चतुरी भाई, बात तौ सही कह रहे हौ। शहर ते गांव तलक कोराउना कोहराम मचाए है। यही पंद्रह दिनन मा कतना मनई मरि गवा। सब लँग आपा-धइया मची है। हमार बहुरिया पहिले अखबार बन्द करवाए दिहिस। फिर ख़बरिया टीवी चैनल पय रोक लगाए दिहिस। कोराउना केरी खबरन ते वहिके मन मा दहशत बैइठ गय। बड़ी आफत मची है चारिव तरफ। अस्पताल अउ श्मशान क्यारु रोना-पिटना द्याखा नाय द्याखा जात भइय्या। लोगन का आक्सीजन, दवा अउ वेंटिलेटर नाय मिलि रहे। सरकार वैसी चुनाव परी रही। कोराउना ऐसी फैलत चला गवा। दुनिया का कोराउना जैसन महाब्याधि बांटि कय चीन ससुरा तमाशा देखि रहा। सगरी दुनियम मरमरा लाग है।
मुन्शीजी बोले- पिछले साल मोदी सरकार ने सही समय पर सही निर्णय लेकर कोरोना संक्रमण को फैलने से रोक लिया था। लेकिन, इस वर्ष केंद्र सरकार व राज्यों सरकारों ने कोरोना को हल्के में लेने की भूल कर दी। फलस्वरूप, पूरे देश में तबाही मच गई। महाराष्ट्र, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, बिहार व गुजरात इत्यादि राज्यों में कोरोना हाहाकार मचाए है। महाराष्ट्र, दिल्ली व यूपी सहित कई प्रदेशों में लोगों को इलाज भी नहीं मिल पा रहा। सरकारों के पास साल भर का समय था, परन्तु, कोरोना से लड़ने की समुचित व्यवस्था नहीं कर सकीं। देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को अपेक्षित ढंग से मजबूत नहीं बनाया गया।
कासिम चचा ने मुन्शीजी का समर्थन करते हुए कहा- कोरोना को लेकर केन्द्र सरकार व राज्य सरकारें पूरी तरह फेल नजर आ रही हैं। जब प्रचंड आग लग गयी, तब सरकारें कुंआ खोद रही है। इस बार नेता, अधिकारी सब चुनाव में मस्त रहे। बिहार के विधानसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल, असम, पंडुचेरी, तमिलनाडु व केरल आदि में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज गया। इधर, यूपी में त्रिस्तरीय पँचायत चुनाव का भी डंका बजा दिया। चुनाव प्रचार से कोरोना संक्रमण तो बढ़ा ही है। वहीं, चुनाव में नेताओं और अधिकारियों के व्यस्त होने से कोरोना से जंग लड़ने की तैयारी मुकम्मल नहीं हो सकी। कोरोना टीका ईजाद हुए कितने महीने हो गए, किंतु टीकाकरण रफ़्तार नहीं पकड़ रहा है। क्योंकि, मांग के अनुरूप टीके की उपलब्धता नहीं है।
इसी बीच चंदू बिटिया गुनगुना नींबू पानी और गिलोय का काढ़ा लेकर आ गई। हम सबने गुनगुना पानी पीने के बाद काढ़े के कुल्हड़ उठा लिये। बतकही को आगे बढाते हुए बड़के दद्दा बोले- सारा दारोमदार सरकारों पर डालकर हम अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त नहीं हो सकते हैं। जनता ने घोर लापरवाही की है। किसी ने भी कोविड-19 के प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। अगर सब लोग मॉस्क और दो गज की दूरी का ही पालन करते तो आज ये दिन न देखने पड़ते। महामारी ने जब विकराल रूप धारण कर लिया, तब भी लोग बेपरवाह हैं। शहर से गांव तक के लोग बिना मॉस्क के भीड़ में जाते हैं। चुनाव टालने की बात करने वाले लोग खुद मुंडन, तिलक, शादी व अन्य कार्यक्रम नहीं टालते हैं। हजारों लोग बेमतलब बाहर घूमना नहीं बन्द करते हैं।
चतुरी चाचा बोले- भाई, यह समय आपस में बहस करने का नहीं है। एक दूसरे की टांग खींचने में समय बर्बाद मत कीजिये। सब लोगों को एकजुट होकर इस राष्ट्रीय आपदा से लड़ना होगा। कोरोना अभी काफी लंबा चलेगा। इस महामारी से बचने के लिए आमजन को अपनी दिनचर्या, खानपान और जीवन जीने का तौर-तरीका बदलना होगा। हम सबको अपनी सनातनी जीवन शैली को फिर से अपनाना होगा। तभी हम लोग कोरोना को मात देने में सक्षम होंगे। चतुरी चाचा ने मेरी तरफ मुख़ातिब होते हुए कहा- रिपोर्टर, तुम काहे मौन साधे हौ। अरे! कोरोना केरे बारे मा तुमहूँ कुछु बताव भइय्या।
हमने सबको बताया कि कोरोना की यह लहर बड़ी जानलेवा है। मैंने खुद न जाने कितने अपनों और देश की अनगिनत विभूतियों को खोया है। आज दुनिया में अगर सबसे तेज कहीं संक्रमण फैल रहा है, तो वह अपना देश भारत ही है। यहाँ रोज चार लाख से अधिक लोग संक्रमित हो रहे हैं। वहीं, कोरोना तीन हजार से ज्यादा लोगों को रोज मार डालता है। हालांकि, यहाँ अब स्वस्थ होने वालों का आंकड़ा बढ़ने लगा है। विश्व के दर्जनों देश भारत को मदद पहुंचा रहे हैं। मोदी सरकार भी अब एक्शन मूड में आ गयी है। देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। कोरोना वैक्सीन लगाने का अभियान भी तेजी पकड़ने लगा है। एक मई से 18 साल से ऊपर वाले समस्त भारतीयों को टीका लगना शुरू हो गया है। जनता भी अब डर के मारे मॉस्क और दो गज की दूरी का पालन करने लगी है। उम्मीद है कि निकट भविष्य में कोरोना पर जीत हासिल हो जाएगी।
इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। आप सभी विशेषकर पत्रकार बंधुओं को श्रमिक दिवस की बड़ी बधाई! मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे की बेबाक बतकही लेकर हाजिर रहूँगा। तब तक के लिए पँचव राम-राम!

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