साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

ज प्रपंच चबूतरे पर पूरी तरह सन्नाटा था। चबूतरे पर न चतुरी चाचा थे और न ही कोई प्रपंची। मुझे लगा कि मैं कुछ जल्दी ही आ गया। तभी चतुरी चाचा की आवाज सुनाई दी। चाचा बोले- रिपोर्टर, इधर मड़हा में आ जाओ। मैंने मड़हा की तरफ रुख किया। वहां चतुरी चाचा के साथ मुन्शीजी व कासिम चचा बैठे थे। मैंने भी हाथ सेनिटाइज किया और तख्त के एक कोने में बैठ गया। तभी ककुवा व बड़के दद्दा की जोड़ी आ गई।
ककुवा ने आते ही पूछा- का हो चतुरी भाई, आजु चबूतरा पय बैठकी नाय किहौ। चतुरी चाचा बोले- देख रहे हो। हज़ारों लोग रोज कोरोना की चपेट में आ रहे हैं। सैकड़ों लोग काल कलवित हो रहे हैं। अपने गांव-जंवार में भी कोरोना का संक्रमण फैलने लगा है। एक दर्जन से ज्यादा लोग बैमौत मारे जा चुके हैं। ऐसे गमगीन माहौल में चबूतरे पर बैठकर प्रपंच करना ठीक नहीं है। लोग कहेंगे कि चारों तरफ मौत तांडव कर रही है। इन लोगों को प्रपंच सूझ रहा है। जबकि हम लोग प्रपंच में समाज और राष्ट्र हित की ही बातें करते हैं।
इस पर ककुवा ने कहा- सही कहेव चतुरी भाई। काहे ते गांव मा कुछ लोगन का कोराउना पकड़े हय। भरोसे केर लरिका अस्पताल मा भरती हय। वहिके आक्सीजन लागि हय। भरोसे काल्हि हमका मिले रहयँ। उई बतावत रहयं कि दूई लाख रुपया खर्च होय चुका। आक्सीजन अउ दवा सबु ब्लैक मा मिलि रहा। इसी बीच चंदू बिटिया सबके लिए गुनगुना नींबू पानी और गिलोय का काढ़ा लेकर आ गई। सभी परपंचियों ने नींबू पानी पीने के बाद गिलोय काढ़े का कुल्हड़ उठा लिया।
मुन्शीजी ने बतकही को आगे बढ़ाते हुए कहा- वैक्सीन आने के बाद आई कोरोना की दूसरी लहर ने भारत के पूरे सिस्टम की पोल खोल दी। स्वास्थ्य विभाग की लाचारी पूरी दुनिया देख रही है। सत्तारूढ़ दल और विपक्षी दलों के नेता चुनाव-चुनाव खेलते रहे। जिम्मेदार अधिकारी अफसरशाही में मस्त रहे। इधर, जनता भी बेपरवाह हो गयी। फलस्वरूप, कोरोना ने विकराल रूप धारण कर लिया। आलम यह है कि न अस्पताल में बेड हैं न ऑक्सीजन। जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी चल रही है। एम्बुलेंस और श्मशान में भी मारामारी मची है। कोरोना शहर से लेकर गांवों तक हाहाकार मचाए है। सैकडों लोग रोज काल कलवित हो रहे हैं।
कासिम चचा ने कहा- पिछले साल मोदी ने ताली-थाली बजवाई थी। फिर दीपावली मनवाई थी। पूरे देश को लॉकडाउन किया था। गरीब परिवारों को हर महीने अनाज और गैस सिलिंडर मुफ्त दिया था। किसानों, मजदूरों व गरीब महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने सहायता राशि डाली थी। तब इस साल की तरह न लोग मर रहे थे और न ही इतना संक्रमण था। परंतु, इस साल बाकी सब तो छोड़ो सरकार कोरोना मरीजों को ऑक्सीजन तक मुहैय्या नहीं करवा पा रही है। पीड़ितों को अस्पताल में जगह नहीं मिल रही है। हज़ारों हजार लोग अपने घरों में जिंदगी-मौत के बीच झूल रहे हैं। लोग आक्सीजन और दवा के लिए दर-दर भटक रहे हैं। निरीह जनता को मरने के लिए छोड़ दिया गया है।
इस पर बड़के दद्दा बोले- सारा दोष सरकार पर मढ़ना ठीक नहीं है। जनता ने इधर कुछ महीने घोर लापरवाही की है। सब लोग कोरोना से बेफिक्र हो गए थे। मॉस्क और शारिरिक दूरी कहीं दिख नहीं रही थी। जबकि कोरोना सब कहीं सक्रिय था। आज लापरवाही करने का नतीजा सबके सामने है। लाखों लोग रोज संक्रमित हो रहे हैं। हजारों लोग रोज बैमौत मर रहे हैं। सरकार की भी अपनी एक सीमा है। आखिर सरकार करे भी तो क्या करे। ट्रेन और वायुसेना के जहाज से ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है। मोदी सरकार मई-जून में गरीब परिवारों को मुफ्त राशन देने का भी ऐलान कर चुकी है।
चतुरी चाचा कुछ सकारात्मक बातें करते हुए बोले- देखो, सब लोग ज्यादा दुःखी व परेशान न हो। इस समय मरीज भी बहुत है और मौतें भी ज्यादा हैं। अस्पतालों में सारी मौतें कोरोना से ही नहीं हो रही हैं। तमाम लोगों की अन्य बीमारियों से भी मौत हो रही हैं। अनेकानेक कोरोना मरीज संक्रमण की वजह से नहीं, बल्कि कोरोना के डर और चिंता में मर रहे हैं। कोरोना टेस्ट के बाद पॉजिटिव रिपोर्ट मिलते ही लोगों का बीपी बढ़ जाता है। हार्ट बीट भी असामान्य हो जाती है। अंततः उनका ऑक्सीजन भी धड़ाम हो जाता है। वहीं, हजारों कोरोना पीड़ित रोज अपने घर के एक कमरे में रहकर ही स्वस्थ हो रहे हैं। अबतक लाखों लोग घरेलू एवं आयुर्वेदिक उपचार से कोरोना को पराजित कर चुके हैं। इस क्रूर काल में सबसे बड़ी जरूरत सकारात्मक सोच एवं ऊर्जा की है। मरीज हो या तीमारदार सबका मनोबल बहुत ऊंचा रहना चाहिए। क्योंकि, कमजोर आत्मबल वालों को कोरोना जल्दी ढेर कर देता हैं।
अंत में हमने सबको बताया कि कोरोना संक्रमण के मामले में भारत तमाम देशों को पीछे छोड़ चुका है। भारत में 24 घण्टे में तकरीबन साढ़े तीन लाख नए मामले आ जाते हैं। रोज करीब तीन हजार मौतें हो रही हैं। वहीं, दो लाख से ज्यादा लोग रोज स्वस्थ भी हो रहे हैं। उधर, कोरोना की वैक्सीन बहुत तेजी से लगाई जा रही है। अगले महीने से 18 साल से अधिक आयु वाले सभी भारतीयों को टीका लगने लगेगा। कई राज्य सरकारों ने युवाओं को मुफ्त टीका देने का ऐलान किया है। केंद्र सरकार 45 साल से ऊपर वालों को मुफ्त वैक्सीन लगा ही रही है। ऐसे में टीकाकरण अभियान अधिक तेजी से चलेगा। देखने में आया है कि वैक्सीन की डबल डोज ले चुके लोगों में से नाम मात्र व्यक्तियों को ही कोरोना का संक्रमण हो रहा है। अभी तक वैक्सीन ले चुके किसी व्यक्ति की कोरोना से मौत नहीं हुई है। इसलिए हर किसी को कोरोना का टीका लगवा लेना चाहिए।
इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बेबाक बतकही लेकर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

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