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हाई कोर्ट को कोविड-19 मुद्दों पर सुनवाई से नहीं रोका, बिना आदेश पढ़े लगाया गया दुर्भावनापूर्ण आरोप : सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने देश के अलग-अलग हाई कोर्ट में कोविड-19 से जुड़े मामलों को अपने पास ट्रांसफर करने को लेकर लगाए गए दुर्भावनापूर्ण आरोपों पर खेद जताया. कोर्ट ने कुछ सीनियर वकीलों को फटकार लगाई और कहा कि उसने देश में कोविड-19 से जुड़े मामलों की सुनवाई करने से हाई कोर्ट को नहीं रोका है. जस्टिस एलएन राव ने कहा कि आदेश को बिना पढ़े ही, जो चीजें कही नहीं गई उसके आरोप लगाया जाने लगा. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई को 27 अप्रैल के लिए स्थगित कर दिया, क्योंकि केंद्र सरकार ने जवाब दाखिल करने के लिए और समय की मांग की.

उन्होंने कहा, “क्या आदेशों पर इस तरह से बात की जाती है जब वैसा कोई आदेश पारित ही नहीं हुआ हो?” चीफ जस्टिस एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली बेंच ने गुरुवार को कोरोना महामारी पर स्वत: संज्ञान लिया था और कहा था कि इससे जुड़े अलग-अलग हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई से किसी तरह का भ्रम पैदा कर सकता है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट में लंबित मामलों की सुनवाई पर रोक नहीं लगाई और ना ही केस को अपने पास ट्रांसफर किया.

इन मामलों में देश में ऑक्सीजन सप्लाई की स्थिति, जरूरी दवाओं की सप्लाई, वैक्सीनेशन के तरीके और लॉकडाउन घोषित करने के अधिकार शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने चारों मुद्दों पर केंद्र सरकार से नेशनल प्लान मांगा था. इस बेंच में जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस आर भट भी शामिल हैं. देश में दिल्ली, बॉम्बे, सिक्किम, मध्य प्रदेश, कलकत्ता और इलाहाबाद हाई कोर्ट में कोरोना महामारी से जुड़े अलग-अलग मामलों पर सुनवाई हो रही है.

चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा था कि वह हाई कोर्ट में जारी कुछ मामलों को अपने पास ले सकती है और खुद उस पर सुनवाई करेगी. हालांकि कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश पारित नहीं किया था. बेंच ने कहा था, “हाई कोर्ट बेहतरीन तरीके से अपने न्यायिक अधिकारों का इस्तेमाल कर रहे हैं. लेकिन इससे भ्रम पैदा हो रहा है और संसाधनों का भी अलग-अलग इस्तेमाल हो रहा है.” कोर्ट ने कहा था कि ऐसा लगता है कि इससे कुछ हद तक घबराहट पैदा हुई.

ऑक्सीजन सप्लाई सही से हो, यही था उद्देश्य- सुप्रीम कोर्ट

मामले में पेश हुए वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे से बेंच ने कहा, “आपने हमारा आदेश पढ़े बिना ही हमपर आरोप लगाया है.” इस पर दवे ने कहा, “यह नजरिए की बात है. हमारी चिंता जायज है क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी ऐसा किया है.” इस पर कोर्ट ने कहा कि शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट पर कभी रोक नहीं लगाई. बेंच ने कहा कि उसका उद्देश्य ऑक्सीजन के इंटर-स्टेट आवाजाही को लेकर था, जो दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई राज्यों के लिए विवाद का विषय बना हुआ था.

बेंच ने गुरुवार को कहा था, “देश के अलग-अलग इलाकों में स्थिति गंभीर है. कोविड-19 संक्रमण के मरीजों और मृत्यु दर में अचानक तेजी देखी जा सकती है. हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र सरकार महामारी के दौरान जरूरी सेवाओं और ऑक्सीजन सप्लाई को लेकर अदालत के सामने एक नेशनल प्लान सौंपेगी.”

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