साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से

नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

(वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार यूपी)

 

ज सुबह से रिमझिम रिमझिम पानी बरस रहा था। मैं जब प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा तो वहां सन्नाटा था। तभी चतुरी चाचा की आवाज आई। रिपोर्टर, आगे बढ़ि आव। मैंने सामने देखा तो मड़हा में चतुरी चाचा तख्त पर विराजमान थे। जबकि मुंशीजी, क़ासिम चचा, ककुवा व बड़के दद्दा आसपास पड़ी कुर्सियों पर विराजित थे। सब लोग अतिवृष्टि और नदियों के उफान से आई विकराल बाढ़ पर चर्चा कर रहे थे।
बड़के दद्दा कह रहे थे कि पहाड़ से लेकर मैदान तक हर तरफ जल प्रलय है। देश के अनेक राज्यों में भारी जानमाल का नुकसान हो रहा है। उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, असम, हिमाचल, दिल्ली व महाराष्ट्र इत्यादि राज्यों में खेती को बड़ा नुकसान हो गया है। सड़क, मकान, दुकान ध्वस्त होने साथ सैकड़ों मनुष्यों और पशुओं की मौत हो चुकी है।

मुंशीजी ने बड़के दद्दा की चिंता को जायज ठहराते हुए कहा कि हर साल बाढ़ आती है। कभी कम तो कभी ज्यादा भयंकर होती है। नेतागण हेलीकॉप्टर से बाढ़ का नजारा लेते हैं। अधिकारीगण बाढ़ के बजट का बंदरबांट करते हैं। बाढ़ रोकने के लिए जमीन पर कभी काम नहीं होता है। बस, कहीं नाव चलवा दी जाती है। कहीं आलू-पूड़ी वितरण हो जाता है। आखिर में किसानों को हजार-पाँच सौ की चेक पकड़ा दी जाती है। बाढ़ के स्थायी निराकरण की कोई ठोस योजना नहीं बनती है।
ककुवा बोले- हमहूँ काल्हि टीवी मा बूड़ा देखा रहय। पाकिस्तान अउ चीन मा महाप्रलय हय। भगवान दुनवक खूब कसे हयँ। गनीमत हय कि अपने देश मा सरकार मदत तौ कय रही हय। पाकिस्तान अउ चीन मा बाढ़ पीड़ितन का कौनव पुछार नाई हय। दुनव जगह केरी जनता मरी जाय रही। इमरान लंबू अउ जिनपिंग गाटियर बहिया मा बहि रही अपनी जनता का नाय देख़ि रहे। उइ दुनव दानव भारत ते जुद्ध करय खातिर फेंटा बाँधि रहे हयँ। ई दुनव पापिन केरी सजा बेचारी जनता पाय रही। आधेत जादा चीन पानी मा बहा जाय रहा।
इसी बीच चंदू बिटिया नींबू का गुनगुना पानी और तुलसी-अदरक का काढ़ा लेकर आ गई। सबने पानी पीकर काढ़े का कुल्हड़ उठा लिया। ककुवा बोले- का हो चतुरी, आजु ई झरिहक मा पकौड़ी नाय आईं। ई तिनके मौसम मा पकौड़िन क्यार मजा दुगुना होत हय। चतुरी चाचा बोले- आजु हम सब कोई प्रपंच केरे बादि तुमरे घरय चलब। तुम अपनी बहुरिया का फोनु कय देव। वह तब तलक चाय-पकौड़ी केरी व्यवस्था करय। ककुवा ने कहा- इहमा कौनिव व्यवस्था नाय करैक। हमरे घरय सब कोई चलव। तुरतय चाय-पकौड़ी बनि जाई।
कासिम चचा ने बतकही को आगे बढ़ाते हुए कहा- कोरोना महामारी के चलते न खुशी मना पाए और न गम का इजहार कर पाएंगे। बकरीद सूनी बीत गई थी। अब मोहर्रम में न ताजियादारी होगी न ही जलूस निकलेगा। देखो, कल गणेश चतुर्थी थी। कहीं कोई पूजा पंडाल नहीं लगा। पीछे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भी सन्नाटे में गुजर गई। इसी तरह रहा तो आगे दुर्गा पूजा और रामलीला पर भी ग्रहण लग जाएगा। बिना उत्सव के जीवन नीरस होता जा रहा है। स्कूल-कॉलेज बन्द हुए कितने महीने बीत गए। खेती-किसानी बाढ़ निगल गई। धंधा-पानी कोरोना की भेंट चढ़ गया।

हमने कहा- इस समय कोरोना अधिक तेजी से फैल रहा है। अपने देश में लगभग 70 हजार नए मरीज रोज निकल रहे हैं। अबतक 30 लाख से ज्यादा लोग कोरोना से पीड़ित हो चुके हैं। दुनिया में भारत तीसरे नम्बर का संक्रमित देश बन गया है। उत्तर प्रदेश विशेषकर राजधानी लखनऊ में कोरोना का तांडव जारी है। हम लोगों को मॉस्क और दो गज की दूरी का नियम मानना चाहिए। साफ-सफाई के साथ अपने खान-पान पर खास ध्यान देना चाहिए। हम सबको कोरोना के साथ आगे बढ़ना है।
चतुरी चाचा ने कहा- सब लोग अपनी इम्युनिटी पॉवर को खूब मजबूत करो। गिलोय, तुलसी, अदरक, कालीमिर्च, मुलेठी इत्यादि का दैनिक सेवन करो। कोरोना से लड़ते हुए अपने कामकाज को आगे बढ़ाओ। अब सब जने ककुवा भाई के घर चलो। इस बरसात में वहीं स्पेशल चाय और प्याज की पकौड़ी का आंनद लिया जाए।
इसी के साथ आज का प्रपंच समाप्त हो गया। मैं अगले रविवार को चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बतकही को लेकर हाजिर रहूँगा। तबतक के लिए पँचव राम-राम!

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