साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से

नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

(वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी)

मैं आज जब प्रपंच चबूतरे पर पहुंचा, तब चतुरी चाचा नदियारा भउजी से बतियाने में पड़े थे। नदियारा भउजी कनवा घूंघट काढ़े पुरबय टोला का प्रपंच कर रही थीं। दरअसल, चतुरी चाचा का घर गांव के बाहर है। उनका प्रपंच चबूतरा गांव के मुख्य रास्ते पर है। वह अपने चुनिंदा लोगों से पूरे गांव का हाल लेते रहते हैं। चतुरी चाचा हर जरूरतमंद की सेवा में तत्पर रहते हैं। वह कोरोना महामारी में ग्रामीणों को मॉस्क और सैनिटाइजर लगातार वितरित कर रहे हैं। कुछ गरीब परिवारों को राशन और रुपयों से भी मदद दी है। इसलिए अधिकतर लोग उन्हें अपना मुखिया मानते हैं। उनके कुछ विरोधी कहते हैं कि चतुरी यह सब प्रधानी लड़ने के लिए कर रहे हैं।

मेरे पीछे से ही मुंशीजी और कासिम चचा की जोड़ी आ गई। प्रपंच शुरू होते ही नदियारा भउजी अपने खेतों की तरफ रवाना हो गईं। चतुरी चाचा ने बताया कि नदियारा अयोध्या में बनने जा रहे भव्य-दिव्य राम मंदिर के बारे में पूछ रही थी। हमने उसे आगामी पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भूमि पूजन किये जाने की बात बताई। वह यह सूचना सुनकर बड़ी खुश हुई। नदियारा कह रही थी कि चाचा, जब मन्दिर बन जाये, तब बस से हम सबको अयोध्या ले चलना। हम सब आपके साथ रामलला के दर्शन करेंगे। हमने उससे हामी भर दी है। अच्छा, रिपोर्टर तुम कोरोना के बारे में कुछ जानकारी दो।
हमने कहा- चाचा, कोरोना का संक्रमण बड़ी तेजी से बढ़ रहा है। एक दिन में 50 हजार नए मरीज निकल रहे हैं। महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार व छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में मौतों का सिलसिला भी बढ़ रहा है। मध्यप्रदेश के सहकारिता मंत्री के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी कोरोना से पीड़ित हो गए हैं। उप्र के स्वास्थ्य मंत्री कोरोना पॉजीटिव पाए गए हैं। उधर, सदी के महानायक अमिताभ बच्चन कोरोना की जंग लड़ रहे हैं। भारत की तरह अमेरिका, ब्राजील सहित अन्य कई देशों में कोरोना का कहर जारी है।
इसी बीच ककुवा के साथ बड़के दद्दा भी प्रपंच चबूतरे पर आ गए। उनके विराजते ही चंदू बिटिया गुनगुना नींबू पानी, गिलोय का काढ़ा और गेंहू-चने की घुघरी लेकर आ गई। हम सबने लाल मिर्च व लहसुन से छौंकी-बघारी स्वादिष्ट घुघरी खाने के बाद नींबू-पानी पीया। फिर काढ़े के साथ बतकही शुरू हुई।

मुंशीजी बोले- कोरोना की कुछ पूछो न। कल टीवी में देखा था कि बिहार में कई लोग बिना इलाज मर गए। वहीं, एक लड़के की बिना जांच हुए पॉजीटिव रिपोर्ट आ गयी। उसे प्रशासन ने जबरन अस्पताल में भर्ती करवा दिया। लखनऊ में भी स्थिति बड़ी बुरी है। कोरोना संक्रमण बढ़ता ही जा रहा है। अस्पताल कोरोना मरीजों से पट गए हैं। एक कोरोना मरीज 8 घण्टे तक एम्बुलेंस में जिंदगी-मौत के बीच झूलता रहा। अंततः उसे इलाज नहीं मिला। वह बेचारा एम्बुलेंस में ही मर गया।
बड़के दद्दा बोले- सरकार ने कोरोना से लड़ने के सभी जरूरी कदम उठाए हैं। परन्तु, अफसरों के निकम्मेपन से कोरोना मरीजों की सही समय से जाँच नहीं हो पा रही है। जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही कोरोना मरीजों को अपेक्षित इलाज भी नहीं मिल पा रहा है। जब से लॉकडाउन खुलने की प्रक्रिया शुरू हुई है। तब कोरोना संक्रमण बढ़ा है। क्योंकि, अब जनता पूरी तरह लापरवाह हो गई है। देश में ज्यादातर लोग सरकार के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। कोरोना शहर से निकल कर गांवों में दस्तक देने लगा है।
कासिम चचा ने कहा- यूपी में कोरोना को लेकर प्रशासन भी उदासीन है। स्थानीय प्रशासन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं करवा रहा है। मॉस्क न लगाने वालों से जुर्माना भी नहीं वसूल रहा है। शहर हो या कस्बा हर जगह भारी भीड़ उमड़ रही है। सड़कों पर भारी आवागमन को देखकर लगता ही नहीं है कि कोरोना महामारी लोगों को बेमौत मार रही है। वहीं, सरकार ने बक़रीद पर सामूहिक नमाज अता करने पर रोक लगा दी है। उस दिन बाजार भी बन्द रखने का आदेश हो गया है। आखिर कुर्बानी के लिए पशु कहाँ से खरीदा जाएगा? बिना कुर्बानी के बकरीद कैसे होगी? दैहिक दूरी के साथ नमाज़ पढ़ने से क्या दिक्कत थी? सरकार का यह निर्णय समझ से परे है।

चतुरी चाचा बोले- कोरोना से लड़ना सिर्फ सरकार और सामाजिक संस्थाओं का ही कार्य नहीं है। कोरोना को पराजित करने के लिए हर व्यक्ति को लड़ना होगा। यह एक सामुहिक जंग है। इसे नेताओं अथवा अफसरों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता है। राजस्थान में देखो क्या हो रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार बचाने के लिए अपने गुट के विधायकों के साथ एक होटल में बन्द हैं। वहीं, बागी सचिन पायलट गहलोत सरकार को गिराने के लिए अपने वफादार विधायकों के साथ हरियाणा के एक रिसॉर्ट में हैं। अब यह मामला हाइकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। वहाँ की जनता कोरोना की जंग लड़ रही है। जिन जनप्रतिनिधियों को इस वक्त जनता की सेवा करनी थी। वह सभी होटल/रिसॉर्ट में पिछले हफ्ते से मजे कर रहे हैं। अफसर भी नेताओं की सेवा में जुटे हैं।
हमने कहा- आमजन केंद्र सरकार के दिशा निर्देशों का अक्षरशः पालन करने लगे तो कोरोना स्वत: ही भाग खड़ा होगा। लेकिन जनता मनमानी पर उतारू है। इसका नतीजा भी जनता को ही भुगतना पड़ेगा। यूपी में शनिवार और रविवार को सम्पूर्ण लॉकडाउन की वजह से कुछ गनीमत रहती है। हालांकि, शराब की दुकानें बराबर खुली रहती हैं।

बड़ी देर से सबकी बातें सुन रहे ककुवा बोले- हमका लागत हय कि ई बखत तौ कोरोउना से जादा जल प्रलय नासि पढ़े हय। अपनी यूपी मा होय चाहे बिहार अउ असम महियाँ, सब जगहन पय सैलाब तबाही मचाए हय। जौनि नदी देखाव वहय उफनाय रही। बांध टूटित जाय रहे। बाढ़ ते मनई अउ हरहा रोजु मरि रहे। घरु बखरी सबु गिरि रहे। हजारन मनई सड़क पय आय गवा हय। हर साल बरसात मा यह विनाशलीला होत हय। मुदा, सरकार कौनव ठोस उयाय आजु तलक नाय किहिस।
इसी के साथ आज की पंचायत पर विराम लग गया। मैं अगले रविवार को फिर चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाली बतकही लेकर हाजिर रहूँगा। तब तक के लिए पँचव राम-राम!

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