साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से (नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से

नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

(वरिष्ठ पत्रकार-साहित्यकार, यूपी)

 

ज प्रपंच चबूतरे पर बीचोबीच में चतुरी चाचा विराजे थे। सामने थोड़ी-थोड़ी दूर पर कुर्सियां पड़ी थीं। चबूतरे के एक कोने पर बाल्टी में पानी, लोटा और साबुन रखा था। चतुरी चाचा के पास कुछ मॉस्क और सैनिटाइजर की शीशी भी रखी थीं। चतुरी चाचा गहन मुद्रा में बैठे कुछ सोच रहे थे। मेरे कुर्सी खिसकाने पर उनकी तंद्रा भंग हुई। वह कुछ बोलते तभी पच्छे टोला से कासिम चचा व मुंशीजी आ गए। उन दोनों ने भी हाथ-पैर धोकर अपनी कुर्सी सम्भाल ली।चतुरी चाचा बोले- देखा! मैं जो कह रहा था, आखिरकार वही हुआ। शनिवार से फिर पूरा प्रदेश लॉकडाउन हो गया। गनीमत यही रहे कि तीन दिन बाद खुल जाए। यह सब जनता की घोर लापरवाही के कारण हो रहा है। लॉकडाउन खुलते ही लोग बेमतलब बाहर मटरगश्ती करने लगे। न किसी के मुंह पर मॉस्क, न ही दो गज की दूरी का ख्याल। ज्यादातर लोगों ने बार-बार हाथ धोने या फिर सैनिटाइज करने की आदत भी छोड़ दी। सरकार कोरोना से जुड़े नियम-कानून रटती रह गई।

हमने कहा- चाचा, आप बिल्कुल सही कह रहे हैं। देश में आज आठ लाख से ज्यादा मरीज हो गए हैं। कल ही 24 घण्टे में 27 हजार से ज्यादा मरीज भर्ती हुए थे। आमजन की मनमानी के चलते उप्र में भी कोरोना के मरीज यकायक बढ़ने लगे। वैसे महाराष्ट्र, दिल्ली, तमिलनाडु व गुजरात सहित अन्य राज्यों को देखते हुए अपनी यूपी में अभी मरीज और मौत दोनों का आंकड़ा ज्यादा नहीं है।
इसी बीच ककुवा व बड़के दद्दा भी प्रपंच चबूतरे पर आ गए। चतुरी चाचा ने दोनों से कहा कि तुम दोनों जन अक्सर आने में देर करते हो। सात बजे तक सब निबटाकर आ जाया करो। बतकही का सिलसिला आगे बढ़ाते हुए मुंशीजी बोले- अब तो गांवों में भी कोरोना घूम रहा है। इस समय कोरोना महामारी के साथ आकाशीय बिजली, तूफान व बाढ़ आदि से भी लोग काल कलवित हो रहे हैं। फरवरी से जुलाई आ गया, किंतु कोरोना से मुक्ति नहीं मिल सकी। कोरोना की दवा और वैक्सीन को लेकर तरह-तरह की खबरें आ रही हैं। सारा कामकाज, धंधा-पानी व पढ़ाई-लिखाई सब चौपट हो गई। कोरोना के चलते महंगाई भी सुरसा की तरह मुँह फैलाने लगी है।

इसी दौरान चंदू बिटिया गुनगुना नींबू पानी, तुलसी-अदरक का काढ़ा और गर्मागर्म कटहल की बरिया लेकर आ गई। सबने कटहल की बरिया खाकर नींबू पानी पीया, फिर काढ़ा उठा लिया। चंदू जब जाने लगी तो ककुवा बोले- अरे पोती ई दुई ठौरी ताजी लौकी लेहे जाव। आज अपने हाता मा पहली बार चार लौकी तूरा हय। चंदू लौकी लेकर घर चली गयी। तब एक बार फिर पंचायत शुरू हुई। कासिम चचा बोले- भारत की दम और विश्व बिरादरी के एकजुट होने से चीन पीछे हट गया। अब पाकिस्तान और नेपाल को झटका लगा होगा। मोदी जी के लेह लद्दाख जाने तथा चीन को आर्थिक चोट देने के बाद से ड्रैगन के तेवर नरम पड़ने लगे थे।
बड़के दद्दा ने विषय बदलते हुए कहा कि आखिरकार यूपी पुलिस एवं एसटीएफ ने शुक्रवार को कानपुर के दुर्दांत अपराधी विकास दुबे को भी मुठभेड़ में मारा डाला। पुलिस उसके चार खास गुर्गों को पहले ही मौत के घाट उतार चुकी थी। साथ ही, पुलिस को शहीद करने में संलिप्त कई अपराधियों को गिरफ्तार भी कर चुकी थी। कुख्यात अपराधी विकास दुबे ने दो जुलाई की रात अपने गुर्गों के साथ सीओ सहित आठ पुलिसकर्मियों को गोली से भून डाला था। फिर अपने साथियों के साथ बिकरु गांव से फरार हो गया। मुख्यमंत्री योगी जी ने इसे एक चैलेंज के रूप में लिया। पुलिस और एसटीएफ चौबेपुर गैंग के पीछे पड़ गयी। आठ दिनों में पुलिस ने अपना हिसाब-किताब बराबर कर लिया।

ककुवा बोले- हम तौ बसि याक बात जानित हय। नेता अउ पुलिस मिलिकय छोटे-मोटे बदमाश का खूँखार अपराधी बनावत हयँ। खादी अउ खाकी केरे आशीष ते विकास जइसन भस्मासुर तैयार होते हयँ। अपने यूपी मा कतने विकास पइदा होय चुके हयँ। कौनिव गिनती नाय हय। योगी महराज केरी कड़ाई ते कुछ राहत हय। अपराधी तनुक ठंडे हयँ। मुला यूह विकसवा खुराफात करत रहा। जब खाकी पर बनि आई, तब विकसवा केर सर्वनाश कीन जाय रहा। सरकार का चाही कि अब समूचे राज्य मा अपराधिन केरि बैंड बजाय देय। अपराधिन का पालय-पोषाय वाले नेतन अउ अधिकारिन का जेलिमा ठूंस देंय। तब जाइके समाज का अपराधिन ते मुक्ति मिलि पाई।
इसी के साथ आज की पंचायत खत्म हो गयी। जब हम सब चलने लगे तो चतुरी चाचा ने रोक लिया। चाचा बोले- तुम सबने तो कटहल की बरिया खाई। अब एक-एक कटहल अपने घर लेते जाओ। हमने कल शाम तुम सबके लिए अपनी बागिया से कटहल मंगवाएँ थे। हम सब कटहल लेकर वहां से निकल लिये। मैं अगले रविवार को फिर चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे पर होने वाले प्रपंच को लेकर हाजिर रहूँगा। तब तक के लिए पँचव राम-राम!

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