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साथी खास कविता प्रतियोगिता से:-

बचपन की यादें

वो बचपन की यादें भी कितनी हसीन थीं
न कुछ पाने की चिंता ..
न खोने का डर….
वो कागज की नाव
वो पेड़ों के झूले…
वो मिट्टी का घरौंदा
और रेत के टिले..
वो माँ की मार
और पापा का प्यार…
वो मेरा रूठना…
और माँ का मनाना…
वो बचपन का चलना
और फिर गिर जाना..
चोट न लगने पर भी..
वो बहाने बनाना..
बात बात पर भैया को
डांट सुनवाना..
पापा की गोद में सोना
और माँ कख लोरी सुनाना..
वो दोस्तों के साथ
दिन भर मस्ती में खेलना…..
पढ़ाई न करने के
सौ झूठे बहाने बनाना….
कभी पेप दर्द ..
तो कभ सर दर्द के बहाने बनाना…
बड़ा मुस्किल है बचपन भुलाना…

प्रतीभा कुमारी
सौजन्य साथी वेलफेयर केयर सोसायटी

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