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साथी कविता प्रतियोगिता से

गरीब की भूख

गरीब की भूख
क्या क्या नहीं उससे करवाती है,
जिंदगी के सारे रंग
उसके सामने लाती है।

भूख से तड़पे
और रोटी को तरसे,
ना खाने को रोटी
न पीने को पानी।

वो हर पल मेहनत करता है ..
भूख मिटाने की
अपना पेट भरने की
और परिवार चलाने की..

पेट के कारन वो
दर दर भटकते हैं..
और गरीबी की जिंदगी
हर पल वो जिते हैं।

अगर खाने को कुछ मिल भी जाए ..
तो बांट कर वो खाते हैं..
न किसी से कोई शिकायत करते हैं..
न इल्जाम लगाते हैं…

इसी आश में जिंदगी निकल जाती है..
गरीब की भूख ..
भूख से हीं मिट जाती है..

प्रतिभा कुमारी
साथी वेलफेयर केयर सोसायटी

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