कृषि

बिहार : 50 प्रतिशत सब्सिडी पर करें सहजन की खेती (विस्तृत जानकारी)

डेस्क : किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार विभिन्न तरह के नवाचारों को बढ़ावा दे रही है जिससे किसान पारंपरिक खेती को छोड़ अन्य फसलों को खेती की और रुख कर सकें | इसके लिए केंद्र सरकार एवं राज्य सरकारों के द्वारा बागवानी फसलों के उत्पादन एवं पशुपालन आदि को बढ़ावा देने के लिए कई नई योजनों की शुरुआत की गई है | जिसमें किसानों को नई प्रकार की फसलों का चयन कर उत्पादित करने में सरकार के द्वारा आर्थिक मदद भी दी जाती है | इसमें औषधीय फसलें, सब्जी की खेती, फल एवं फूलों की खेती शामिल है | पिछले वर्ष से बिहार सरकार द्वारा किसानों को सहजन (मोरिंगा) की खेती को बढ़ावा देने के लिए योजना की शुरुआत की गई है | जिसके तहत किसान ऑनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं |

योजना के तहत राज्य में दो वर्षों तक राज्य के 17 जिलों को सहजन कि खेती के लिए लगत का 50 प्रतिशत सब्सिडी दिए जाने का प्रावधान है | कोविड – 19 के कारण यह योजना बीच में बंद हो गई थी जिसे पुन: शुरू किया गया है | सहजन कि खेती से किसान को काफी फायदा होने के साथ–साथ बाजार स्थानीय स्तर पर मिल जाता है | इसके फल के अलावा पत्ती तथा शाखा का भी मूल्य मिल जाता है | आयुर्वेदिक दवा में उपयोग होने के कारण इसकी मांग वर्ष भर बना रहती है | किसान समाधान इसकी उपयोगिता के साथ ही इस पर किसानों को मिलने वाले लाभ को लेकर आया है |

सहजन के लाभ

ड्रम स्टिक, सहजन, मुगना, मोरिंगा आदि नामों से पहचाने जाने वाला सहजन औषधीय गुणों से भरपूर है | इसके अलग–अलग हिस्सों में 300 से अधिक रोगों के रोकथाम के गुण पाये जाते हैं | इसमें 92 तरह के मल्टीविटामिन्स, 46 तरह के एन्टीआक्सीडेंट गुण, 36 तरह के दर्द निवारण और 18 तरह के एमिनोएसिड पाया जाता है | चारे के रूप में इसकी पत्तियों के प्रयोग से पशुओं के दूध में आश्चर्यजनक रूप से बढ़ोतरी होती है | इस प्रकार से सहजन मनुष्यों के साथ – साथ पशुओं के स्वास्थ्य के लिए भी काफी लाभदायक है |

सहजन की खेती के लिए चयनित जिले

बिहार के 38 जिलों में से 17 जिलों के लिए योजना को संचालित किया जा रहा है | यह सभी जिला पिछले वर्ष से ही शामिल है | बिहार के 17 जिले इस प्रकार है :- गया, औरंगाबाद, नालंदा, पटना, रोहतास, कैमूर, भागलपुर, नवादा, भोजपुर, जमुई, बाँका, मुंगेर, लखीसराय, बक्सर, जहानाबाद, अरवल एवं शेखपुरा |

किसानों को दिया जाने वाला अनुदान 

इस योजना के तहत सहजन कि खेती को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार किसानों को प्रोत्साहन राशि के रूप में अनुदान देगी | कृषि मंत्री के अनुसार राज्य में सहजन का क्षेत्र विस्तार के लिए 74,000 रूपये प्रति हेक्टेयर इकाई लगत आकलित की गई है | ऊपर के 17 जिलों के किसानों को कुल इकाई लगत का 50 प्रतिशत यानी 37,000 रूपये प्रति हेक्टेयर की दर से सहायतानुदान दिया जाएगा | किसानों को यह सहायतानुदान दो किस्तों में दिया जाएगा, जिनमें प्रथम वर्ष 27,750 रूपये प्रति हेक्टेयर तथा दिव्तीय वर्ष 9,250 रूपये प्रति हेक्टेयर की दर से देय होगा | यहाँ पर यह ध्यान रखना होगा कि दिव्तीय वर्ष में 90 प्रतिशत सहजन का पौधा जीवित रहने पर ही दिव्तीय क़िस्त का भुगतान किया जायेगा |

सहजन की उन्नत किस्में

गाँव – देहात में सहजन बिना किसी देख-भाल के किसान अपने घरों के आस–पास कुछ पेड़ लगाकर रखते हैं, जिसका फल का उपयोग वे साल में एक या दो बार सब्जी के रूप में करते हैं | भारत में सहजन के पारम्परिक प्रभेद के अतिरिक्त उन्नत प्रभेद पी.के.एम. – 1, पी.के.एम. – 2, कोयम्बटूर – 1, और कोयम्बटूर – 2, की खेती की जाती है |

योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन

योजनना का क्रियान्वन बिहार सरकार के उद्यान विभाग के द्वारा किया जा रहा है अतः किसान http://horticulture.bihar.gov.in/ दी गई लिंक पर आवेदन कर सकते हैं | योजना के संबंध में विशेष जानकारी प्राप्त करने के लिए अपने कृषि समन्वयक / प्रखंड उधान पदाधिकारी / प्रखंड कृषि पदाधिकारी / सहायक निदेश, उधान / जिला कृषि पदाधिकारी से सम्पर्क कर सहजन की खेती के लिए आवेदन कर सकते हैं |

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