साहित्य

हास्य-व्यंग्य : चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे से…..(नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान)

नागेन्द्र बहादुर सिंह चौहान

( वऱिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार, यूपी)

 

ज चतुरी चाचा ने प्रपंच चबूतरे पर आते ही मुझे हांक लगाई। मैं भी तुरन्त प्रपंच चबूतरे पर पहुंच गया। वहां कासिम चचा और मुंशीजी पहले से ही कुर्सियों पर विराजमान थे। आप सबको पता ही है कि कोरोना महामारी के चलते प्रपंच चबूतरे पर दो गज की दूरी का पालन होता है। साथ ही, सभी प्रपंचियों को मॉस्क लगाना अनिवार्य है। चरण स्पर्श और हाथ मिलने पर पाबंदी है। चतुरी चाचा की कड़ाई के चलते सभी लोग चबूतरे पर बैठने के पहले साबुन से हाथ-पैर भी धोते हैं। चतुरी चाचा का प्रपंच चबूतरा गांव की मुख्य सड़क पर ही है। चतुरी चाचा गांव आने जाने वाले हर व्यक्ति पर नजर रखते हैं। उनके लिहाज में प्रत्येक नर-नारी मॉस्क लगाकर ही बाहर निकलता है।
प्रपंच की शुरुआत करते हुए चतुरी चाचा ने कहा- लॉकडाउन का पहला चरण खुलते ही कोरोना के मरीज देश में बढ़ने लगे हैं। अब जनता को खुद सावधानी बरतनी होगी। सरकार ने अपनी तरफ से बहुत कुछ किया है। सारे नियम बना दिये हैं। इन नियमों का पालन करते हुए लोगों को बाहर निकलना चाहिए। देश हित में अब बन्दी से बाहर निकलना ही होगा। धीरे-धीरे सभी कामकाज शुरू करने होंगे। वरना भारत की अर्थव्यवस्था बहुत पीछे चली जाएगी।
चतुरी चाचा की इस बात का समर्थन करते हुए कासिम चचा बोले- कोरोना के साथ जीना ही पड़ेगा। वैसे देखा जाए तो अपने देश में कोरोना से संक्रमण और मौतें आबादी को देखते हुए नाम मात्र हैं। मोदी सरकार ने बहुत सही समय पर लॉकडाउन किया था। केंद्र सरकार ने अब राज्य सरकारों की सलाह पर लॉकडाउन को चरण बद्ध तरीके से खोलना शुरू किया है। हम सबको सरकारी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। तभी कोरोना की जंग जीती जा सकेगी। इस दौरान बड़के दद्दा व ककुवा की जोड़ी भी आ गयी।
मुंशीजी बोले- कोरोना जैसी महामारी के बीच तरह-तरह की प्राकृतिक आपदाएं भी आ रही हैं। आँधी, बारिश, भूकम्प, तूफान आ रहा है। उधर, मानव जनित समस्याएं अलग से नुकसान पहुंचा रही हैं। किसी देश में दंगा हो रहा है। कुछ देश दूसरे देश से जंग करने पर आमादा हैं। अभी देखो क्या-क्या होता है? आखिर प्रभु चाहते क्या हैं? मानव का जीना दूभर कर दिया है। पूरी दुनिया में यह वर्ष 2020 आपदा के लिए याद किया जाएगा।
इसी बीच चंदू बिटिया सबके लिए गुनगुना नींबू पानी और गिलोय का काढ़ा लेकर आ गयी। सबने पानी पीया और फिर काढ़े का कुल्हड़ उठा लिया। कोरोना महामारी के आते ही चतुरी चाचा चाय की जगह कभी गिलोय का काढ़ा तो कभी तुलसी, अदरक, दालचीनी, कालीमिर्च का काढ़ा पिला रहे हैं। इससे प्रपंचियों में रोगों से लड़ने की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
गिलोय-काढ़े के साथ बतकही आगे बढ़ी। बड़के दद्दा बोले- आजकल तो नेपाल भी भारत को आंखें दिखा रहा है। पाकिस्तान तो हमेशा ही सीमा पर अशान्ति रखता है। पाक की सेना हिन्दुस्तान में तबाही मचाने के लिए बराबर आतंकवादियों को भेजती रहती है। इधर, चीन ने सीमा विवाद को नया रंग देने के लिए लद्दाख़ में अपनी सेना को लगा रखा है। चीन ने ही नेपाल को भारत की भूमि को अपनी बताने के लिए उकसाया है। ड्रैगन पाकिस्तान की भी पीठ थपथपा रहा है। चीन ने तिब्बत को पहले ही हड़प लिया था। अब हांगकांग और ताइवान पर उसकी नीयत खराब है। चीनी की विस्तारवादी नीति का पूरी दुनिया को विरोध करना चाहिए।
चतुरी चाचा बोले- क्या बात आज रिपोर्टर बिल्कुल शांत हैं। हमने कहा-ऐसा नहीं चाचा। सब बहुत बढ़िया मुद्दे उठा रहे हैं। मैं वही सुन रहा हूँ। चीन को लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। अब भारत 1962 वाला भारत नहीं है। हमारा देश अब चीन की आंख में आंख डालकर बात कर रहा है। भारत को विश्व के सभी ताकतवर देशों का समर्थन भी मिल रहा है। अमेरिका अब भारत को जी-7 ग्रुप में शामिल करवाने के लिए प्रयासरत है। अमेरिका खुद चीन से दो-दो हाथ करने की सोच रहा है। चीन को औकात में लाने के लिए हम भारतीयों को चीनी उत्पादों का सम्पूर्ण बहिष्कार करना होगा। हम सबको चीन की कमाई पर चोट करनी चाहिए।
काफी देर से पंचायत सुन रहे ककुवा बोले- ई चीनी ससुरे कबहूँ दुनिया केर भला नाय सोचिन। यहै पूरी दुनिया मा कोरउना जैसि महाब्याधि दिहिस हय। सब दयाश मिलिकय यहिका फनु कुचिलय देंय। तबहिन यूह सुधरी। ई दुश्मन केर कौनव सामानु अब हम पंच खरीदबै न करि। चीन जौनि थरिया खात हय, वही मा छेद करत हय। वइसन इहकी हरकतन ते अमेरिका पगलान हय। ट्रम्पवा इहकी पुंगी बजाय देतय तौ मजा आय जात। द्याखव तौ सब कहूँ कोराउना बाँटि कय अपना ससुर मजा लय रहा। दुनिया भरमा आजव हजारों मरि रहे अउ चीन मा कोराउना खत्म होय गवा।
ककुवा के इन्हीं बेबाक विचारों के साथ आज की पँचायत का समापन हो गया। मैं अगले रविवार को एक बार फिर चतुरी चाचा के प्रपंच चबूतरे की बतकही लेकर हाजिर रहूँगा। तब तक के लिए पँचव राम-राम !

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