राष्ट्रीय

स्वदेशी लड़ाकू विमान ‘तेजस’ की दूसरी स्क्वाड्रन वायुसेना में शामिल

डेस्क : देश में इस वक्त चीन और नेपाल से बॉर्डर पर हो रहे तनाव को लेकर चर्चाएं जारी हैं. इस बीच आज स्वदेशी विमान तेजस की दूसरी स्क्वाड्रन वायुसेना में शामिल हो गई. इस स्क्वाड्रन का नाम ‘फ्लाइंग बुलेट्स’ दिया गया है, जिसकी शुरुआत वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने की. खुद वायुसेना प्रमुख ने तेजस लड़ाकू विमान में उड़ान भरी.

आज इस कार्यक्रम का आयोजन तमिलनाडु के कोयम्बटूर के पास सुलूर एयरफोर्स स्टेशन पर किया गया. यह स्क्वाड्रन LCA तेजस विमान से लैस है. तेजस को उड़ाने वाली वायुसेना की यह दूसरी स्क्वाड्रन है

वायुसेना ने हल्के लड़ाकू विमान तेजस को HAL से खरीदा है. नवंबर 2016 में वायुसेना ने 50,025 करोड़ रुपए में 83 तेजस मार्क-1ए की खरीद को मंजूरी दी थी. इस डील पर अंतिम समझौता करीब 40 हजार करोड़ रुपए में हुआ है. यानी पिछली कीमत से करीब 10 हजार करो़ड़ रुपए कम.

गौरतलब है कि एयरफोर्स स्क्वाड्रन 18 की शुरुआत 1965 में आदर्श वाक्य ‘तीव्र और निर्भय’ के साथ हुई थी. यह स्क्वाड्रन 15 अप्रैल 2016 से पहले मिग 27 विमान उड़ा रही थी. स्क्वाड्रन को इस साल 1 अप्रैल को सुलूर में फिर से शुरू किया गया था.

अगर, लड़ाकू विमान तेजस की बात करें तो यह चौथी पीढ़ी का एक हल्का विमान है. इसकी तुलना अपने जेनरेशन के सभी फाइटर जेट्स में सबसे हल्के विमान के तौर पर होती है.
स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही वायुसेना को इसी साल 36 रफाल लड़ाकू विमानों की पहली खेप फ्रांस से मिलने जा रही है. इस बीच तेजस की एक नई स्क्वाड्रन का शामिल होना राहत भरी खबर है.

गौरतलब है कि वायुसेना में तेजस की नई स्क्वाड्रन की एंट्री तब हो रही है, भारत की चीन और नेपाल के साथ तनातनी जारी है. बीते दिनों लद्दाख में चीन और भारत के सैनिक आमने-सामने आ गए, जिसके बाद से ही बॉर्डर पर जवानों की संख्या बढ़ाई गई है. इसके अलावा भारत ने भी अपनी क्षमता को उस इलाके में बढ़ाया है.

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