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गुरुग्राम से दरभंगा साइकिल पर पहुंची ज्योति को ट्रायल का मौका देगा सीएफआई

भारतीय साइकिलिंग फेडरेशन स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के तहत करता है काम 
बिहार के दरभंगा की रहने वाली है ज्योति कुमारी

डेस्क :  सोशल मीडिया पर पिछले महीने से प्रवासी मजदूरों की दुर्दशा सोशल मीडिया और सुर्खियों में है। 15 साल की एक लड़की अपने घायल पिता को साइकिल पर बिठाकर 1200 किलोमीटर का सफर कर घर पहुंची।

ज्योति कुमारी कोरोना लॉकडाउन में अपने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बिठाकर गुरुग्राम से बिहार के दरभंगा तक पहुंच गई थी। ज्योति ने 1200 किमी से ज्यादा की दूरी आठ दिन में तय करने में रोजाना 150 किमी साइकिल चलाई।

ज्योति के पिता मोहन पासवान दिल्ली में रिक्शा चलाकर परिवार का पेट पालते थे। एक हादसे में उनका घुटना टूट गया, जख्म तो भर गए, लेकिन अब वह ठीक से चल भी नहीं पाते हैं। परिवार इस संकट से उबर पाता इससे पहले ही लॉकडाउन लग गया। जमा किए गए पैसे और राशन खत्म हो गए तो भूखे मरने की नौबत आ गई, सामने एक ही रास्ता था घर लौटना। कोरोना लॉकडाउन के कारण उन्हें कोई वाहन नहीं मिला था। ऐसे में लड़की ने गुरुग्राम से दरभंगा तक का रास्ता खुद सा​साइकिल से नापा। करीब एक हफ्ते तक पिता को साइकिल पर पीछे बिठाकर वह लड़की बिहार के दरभंगा पहुंची। पिता को ले जाने वाली 1200 किलोमीटर साइकिल चलाने वाली 15 वर्षीय ज्योति कुमारी को साइकिलिंग फेडरेशन द्वारा परीक्षण के लिए बुलाया।


चयनित होने के लिए सात-आठ मापदंडों को करना होगा पूरा

इससे बड़ा जीवन-बदलने का अवसर क्या हो सकता है, साइकिलिंग महासंघ 15 महीने की ज्योति को अगले महीने परीक्षण के लिए आमंत्रित करेगा। बता दें साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन ओंकार सिंह ने पीटीआई को बताया कि कम्प्यूटरीकृत साइकिल पर उसे बैठाएंगे और देखेंगे कि क्या वह चयनित होने के लिए सात या आठ मापदंडों को पूरा करता है। उसके बाद उसे यहां आईजीआई स्टेडियम परिसर में अत्याधुनिक नेशनल साइक्लिंग अकादमी में वह प्रशिक्षुओं में से हो सकती है और उसे कुछ भी खर्च नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सीएफआई हमेशा संवारने के लिए प्रतिभा का पता लगाने की कोशिश करता है।भारतीय खेल प्राधिकरण के तत्वावधान में अकादमी, एशिया में सबसे उन्नत सुविधाओं में से एक है और इस खेल की विश्व संस्था यूसीआई की मान्यता है।महासंघ हमेशा प्रतिभावान खिलाड़ियों की तलाश में रहता है

हमेशा प्रतिभावान खिलाड़ियों की तलाश में रहता है महासंघ

ओंकार सिंह ने कहा कि “हमारे पास अकादमी में 14-15 वर्ष की आयु के लगभग 10 साइकिल चालक हैं। इसलिए हम युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना चाहते हैं”।

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