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कनाडा के लोकतंत्र के लिए भारत और चीन सबसे बड़ा खतरा : रिपोर्ट

डेस्क : विपक्ष के बढ़ते दबाव के आगे कनाडा की सरकार उन सांसदों की जांच के लिए राजी हो गई है, जिन पर विदेशी सरकारों के लिए काम करने के आरोप हैं. इन विदेशों में एक देश भारत भी है.कनाडा अपने उन सांसदों की जांच करेगा, जिन पर विदेशी सरकारों के लिए काम करने के आरोप हैं. एक संसदीय समिति ने चीन और भारत को देश के लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया है.

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो पर इन सांसदों के नाम सार्वजनिक करने का दबाव तब से बना हुआ है जब से सुरक्षा मामलों की संसदीय समिति ने पिछले हफ्ते एक रिपोर्ट में कहा था कि कुछ चुने हुए प्रतिनिधि अन्य देशों की कनाडा में दखलअंदाजी की कोशिशों में जानबूझकर या अनजाने में शामिल हुए हैं. समिति ने कहा था कि कुछ सांसदों ने तो कई गोपनीय जानकारियां भी विदेशों के साथ साझा की.

लिबरल पार्टी की सरकार चला रहे जस्टिन ट्रूडो अब तक इन सांसदों के नाम सार्वजनिक करने से इनकार करते रहे हैं. उनका तर्क है कि यह कानून का उल्लंघन होगा और जांच का काम पुलिस की जिम्मेदारी है.

संसदीय समिति ने कनाडा की जासूसी एजेंसियों से मिली जानकारी को अपनी रिपोर्ट का आधार बनाया लेकिन कहा कि वह रिपोर्ट में सांसदों या उनके राजनीतिक दलों के नाम उजागर नहीं कर सकती.

इस रिपोर्ट पर पिछले हफ्ते से ही कनाडा में राजनीतिक बवाल मचा हुआ है. सोमवार को विपक्षी नेताओं ने संसद में इस पर बहस शुरू की और मामले को उस निष्पक्ष जांच दल को सौंपने का प्रस्ताव रखा जो पहले से ही कनाडा में विदेशी हस्तक्षेप के मामलों की जांच कर रहा है.

जन सुरक्षा मंत्री डॉमिनिक ले ब्लांक ने कहा कि वह प्रस्ताव से सहमत हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि समिति ने जिन दस्तावेजों का जिक्र किया है, वे पहले ही जांच दल के पास हैं.

संसद के निचले सदन हाउस ऑफ कॉमंस में ब्लांक ने कहा, “हमें लगता है कि यह आगे बढ़ने का एक जिम्मेदाराना तरीका है, ना कि यहां खड़े होकर गैरकानूनी रूप से नामों का एलान कर देना.”

विपक्षी कंजरवेटिव पार्टी फिलहाल राजनीतिक रूप से मजबूत स्थिति में मानी जा रही है. देश में अगले चुनाव अक्तूबर 2025 तक होने हैं और ताजा सर्वेक्षणों में कहा जा रहा है कि कंजरवेटिव पार्टी को आसान जीत मिलेगी. पार्टी ने विदेशी हस्तक्षेप को एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनाया है. उसने प्रधानमंत्री ट्रूडो पर इस मामले को गंभीरता से ना लेने का भी आरोप लगाया है.

कंजरवेटिव सांसद जसराज सिंह हल्लन ने संसद में कहा, “कुछ सांसदों ने कनाडा के लोकतंत्र में हस्तक्षेप करने वाली विदेशी सरकारों के हित में काम किया. यह हमें चुनने वाले कनाडाई नागरिकों के साथ घिनौना धोखा है.”

पिछले हफ्ते जारी अपनी रिपोर्ट में संसदीय समिति ने कहा था कि देश के लोकतांत्रिक संस्थानों के लिए भारत और चीन मुख्य खतरे हैं.

विदेशी हस्तक्षेप का मुद्दा पिछले साल से ही चर्चा में है और ट्रूडो सरकार ने इसकी जांच के लिए एक आयोग बनाया था. इस आयोग ने पिछले महीने अपनी अंतरिम रिपोर्ट जारी की थी जिसमें कहा गया था कि उसे कनाडा के पिछले दो आम चुनावों में विदेशी हस्तक्षेप के सबूत मिले.

पिछले हफ्ते कनाडा की मुख्य जासूसी एजेंसी ने कहा था कि चीन देश के चुनावों में हस्तक्षेप की लगातार कोशिश कर रहा है. चीन इन आरोपों से इनकार करता रहा है. इस कारण दोनों देशों के बीच तनाव भी चल रहा है.

ऐसे ही आरोप कुछ समय पहले भारत पर भी लगाए गए थे. कनाडा के चुनावों में दूसरे देशों के हस्तक्षेप के आरोपों की जांच कर रहे इस विशेष आयोग ने जनवरी में सरकार से “2019 और 2021 के चुनावों में भारत द्वारा हस्तक्षेप के आरोपों से संबंधित” दस्तावेज मांगे थे. इस आयोग का गठन सितंबर में प्रधानमंत्री ट्रूडो ने किया था.

पिछले साल ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं कि एक कनाडाई सिख नेता हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारतीय जासूसी एजेंसियों का हाथ हो सकता है. उसके बाद से भारत और कनाडा के रिश्ते लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. हालांकि कनाडा ने अब तक भारत को कोई सबूत नहीं दिखाए हैं और भारत इन आरोपों से इनकार करता रहा है.

 

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