नारी स्वास्थ्य

इस गांव में चलता है आशा दीदी का डंडा

आगरा। लॉकडाउन का अनुपालन देखना है तो ठेठ देहात के गांव आसे के पुरा में देखिए। यहां पर कोरोना नहीं, आशा कार्यकर्ता रेनू कुशवाह का ज्यादा डर कायम है। डंडा लेकर जब वो गांव में निकलती हैं, घर के दरवाजे पर भी कोई बैठा दिख जाए तो डांटती हैं। डंडे में दिखावे की सख्ती देख और आत्मीयता भरे शब्दों की डांट सुन गांव वाले तुरंत ही घर में दुबक जाते हैं। वो समझाती हैं-अपनी और अपने परिवार की जिंदगी का तो ख्याल करो।
फतेहाबाद से करीब 15 किमी दूर ठेठ देहात का ये गांव आसे का पुरा इन्हीं आशा दीदी की सक्रियता से आजकल चर्चा में है। करीब डेढ़ हजार की आबादी वाले इस गांव की रेनू कुशवाह आशा कार्यकर्ता हैं। करीब चार साल से स्वास्थ्य जागरूकता फैला रही हैं। कोरोना को लेकर लॉकडाउन लागू हुआ है, रेनू ने गांव में इसके अनुपालन का जिम्मा उठा लिया है। वैसे तो गांव में पहले जैसी न तो चबूतरों पर चौपाल लगती है और न मुहल्ले की महिलाओं का समूह। बच्चे भी गलियों में नहीं, घर के आंगन में ही खेलते हैं।ये सब रेनू की सक्रियता का ही कमाल है। सुबह हो या दोपहर, या शाम। रेनू किसी भी समय डंडा लेकर गांव में निकल पड़ती हैं। यदा-कदा कोई घर के बाहर नजर आया भी तो डांटती हैं- तुम्हें कोरोना का तनिक भी डर नहीं है, डॉक्टर से पूछो? अपनी और अपने परिवार की जिंदगी का तो ख्याल रखो। फिर डंडा फटकारती हैं- चलो, घर के अंदर। बड़े-बुजुर्ग को तो खासतौर पर हिदायत देती हैं। वे आगाह करती हैं। कोरोना शहर से होते हुए गांवों में भी आ रहा है। इसलिए होशियार हो जाओ। घर के बाहर निकलोगे तो बीमारी लग जाएगी।गांव में दो मजदूर परिवार हैं। लॉकडाउन के बाद ये खाली हाथ हैं। रेनू इन परिवारों के लिए खाद्य सामग्री उपलब्ध करा रही हैं। रेनू कहती हैं कि हम अपनी ड्यूटी पूरी कर रहे हैं। गांव वाले भी हमारी बात मान रहे हैं। कोई बेवजह घर से नहीं निकल रहा।
प्रशासन द्वारा आशा कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लॉकडाउन का पालन कराएं। आसे का पुरा में आशा कार्यकर्ता अच्छा काम कर रही हैं।

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