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डॉ. शैलेन्द्र ने बताया कैसे किया ठीक कोरोना संक्रमित को

कानपुर। शहर के पहले कोरोना मरीज 77 वर्षीय बुजुर्ग को इलाज से ठीक करने वाले उर्सला अस्पताल के वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. शैलेंद्र तिवारी इसे अपने जीवन का बड़ा चैलेंज मानते हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि 23 मार्च को पहला कोरोना संक्रमित मरीज आने की सूचना से वह खुद घबरा गए थे। यह सोचकर, कोरोना नई महामारी है जो घातक और बड़ी चुनौती है। इसकी कोई दवा भी नहीं बनी है। फिर खुद को समझाया कि वह डॉक्टर हैं, नई-नई चुनौतियां आना स्वाभाविक है। अपनी टीम का भी उत्साह बढ़ाया। मरीज को देखा तो उसकी ज्यादा उम्र की वजह से मुश्किल और बड़ी थी। बुजुर्ग मरीज दुनिया भर की दशा देख खुद भी डरे हुए थे, जीने की आस छोड़ चुके थे।
डॉ. तिवारी बताते हैं कि मरीज का ब्लड प्रेशर 150/100 था, नींद भी नहीं आ रही थी। कोरोना का डर दिमाग पर हावी था, ऐसे में जरूरी था कि पहले उनका डर निकालें। उन्हें हिम्मत बंधाई। कोरोना के इलाज से जुड़ी जानकारी और डाटा का हवाला देकर समझाया कि जिनमें कोरोना के अलावा दूसरी दिक्कतें हैं, वही मर रहे हैं। अच्छी बात भी यही थी कि बुजुर्ग में न डायबिटीज थी, न ही कोई दूसरी बीमारी। उनकी देखरेख में स्टाफ नर्स ज्योति और पारुल को लगाया जो हमेशा उन्हें सकारात्मक सोचने के लिए प्रेरित करती रहीं। इलाज के दौरान मरीज को नींद की गोली दी गई ताकि पहले नींद पूरी हो सके। साथ में एंटीबायोटिक, बुखार, और अन्य दवाएं चलाईं। असर दो दिन में दिखने लगा। जब दो दिन बाद एक्स-रे कराया तो इंफेक्शन से मुक्त होकर चेस्ट पूरी तरह साफ आया। खून की जांच रिपोर्ट भी सामान्य थी। उन्होंने आगे बताया कि वह बुजुर्ग मरीज समझदार और शांत स्वभाव के थे और मेडिकल स्टाफ को पूरा सहयोग करते रहे। वार्ड में जब कोई भी उनके पास जाता वह पहले ही मास्क लगा लेते। उनके बेटे लगातार फोन पर संपर्क में रहे। इलाज के साथ उत्साहवर्धन की वजह से बुजुर्ग तेजी से बीमारी से उबरने लगे। जब दूसरी और तीसरी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई तब 14 दिन पूरे होने पर उन्हें यहां से डिस्चार्ज कर घर भेजा गया। इसमें जिला महामारी वैज्ञानिक डॉ.देव सिंह का भी पूरा सहयोग रहा।

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