नारी

नौ माह कोख में रखने वाली मां के साथ ऐसा सलूक

हमीरपुर। नौ माह कोख में रखकर जन्म देते समय करीब दो सौ हड्डियों के टूटने से भी ज्यादा दर्द सहने वाली एक मां को जब बच्चे बेसहारा छोड़ दें तो उनकी इंसानियत और मानव होने पर धिक्कार होता है। इतना ही नहीं जब वो बूढ़ी मां अपने बच्चों की याद में अंतिम सांसें गिन रही हो और फिर भी वो पास न आएं तो उस मां की पीड़ा देखकर सहज ही आंखें आंसू से भर आएंगी। कुछ ऐसे ही दर्द से गुजरते हुए 80 वर्षीय सूरी के हुए सलूक की दास्तां सुनने वाला भी रो पड़ेगा। बच्चों को आखिरी बार एक नजर देखने की आस के साथ उसने दम तोड़ दिया लेकिन, बेरहम हो चुका बेटा और बेटी कोई भी पास नहीं आया। अकेला छोड़ गईं संताने
हर मां बाप अपनी संतानों का पालन पोषण बड़े दुलार से करता है और खुद परेशान होकर भी उनके पालन में कोई कमी नहीं रखता है। लेकिन, वहीं संतान अंतिम समय में उनका सहारा न बने तो ऐसी मां और पिता पर क्या गुजरती होगी। ऐसा ही कुछ उजनेड़ी गांव निवासी 80 वर्षीय वृद्धा सूरी के साथ हुआ। ग्रामीणों की मानें तो सूरी करीब बीस साल पहले अपने मायके में रहने आई थी। उसे छोड़कर बेटा सुख्खीलाल व बेटी सुधा कानपुर में रहने चले गए थे। ग्रामीणों ने बताया कि सूरी जब मायके आई तो हमेशा अपने बेटे और बेटी के बारे में बातें किया करती थी। बेटी को कभी कभार गांव आते देखा लेकिन बेटा कभी नहीं आया। सूरी अपनी बड़ी बेटी के विक्षिप्त बेटे के साथ कई सालों तक गांव में रही। इसके बाद भाई व विक्षिप्त नाती की मौत के बाद वह बेसहारा हो गई। नेत्रहीन सूरी गांव में खाना मांगकर किसी तरह अपना जीवन व्यतीत करने लगी और सड़क किनारे प्रतीक्षालय में अपना आशियाना बनाकर रहने लगी। वह लोगों से बाते करती तो उसकी बेटा और बेटी से मिलने की इच्छा सामने आ जाती थी। एक घटना के बाद ललपुरा थाना पुलिस ने बीते अक्टूबर माह में सूरी को वृद्धाश्रम में भेज दिया था। बेटा और बेटी को बुलाने का भी प्रयास किया लेकिन कोई नहीं आया। वृद्धाश्रम संचालक ने बताया कि एक दो बार सूरी की उसकी बेटी के बेटे से फोन पर बात हुई है लेकिन कई बार बुलाने पर भी वो नहीं आए। बीते दिवस सूरी की मौत हो गई तो संपर्क किया गया लेकिन जानकारी होते ही बेटा और बेटी का फोन स्विच ऑफ हो गया। बाद में उसका अंतिम संस्कार कराया गया। गांव के लोग सूरी की मौत पर भी बेटा और बेटी के न आने पर धिक्कारते रहे। सूरी की दर्दभरी कहानी सुनने वाले हर शख्स की आंखें भी नम हो गईं।

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